झालावाड़ नगर परिषद में अधिकारियों की कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है। आयुक्त अशोक शर्मा को एपीओ किए जाने के बाद उनके स्थान पर किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। परिषद लंबे समय से कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे चल रही है, जिससे आमजन के पट्टे संबंधी कार्य भी प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार की ओर से आयोजित शहरी राजस्व शिविरों में शहर के लोगों ने पट्टों सहित कई अन्य कार्यों के लिए आवेदन किए थे। अधिकारियों के अभाव में इन आवेदनों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। आयुक्त अशोक शर्मा को एपीओ किए हुए लगभग एक सप्ताह हो गया है, और अभी तक कोई नया अधिकारी नहीं लगाया गया है। इसके अलावा परिषद के राजस्व अधिकारी और नगर नियोजक का भी तबादला हो चुका है। शिविरों में आए आवेदनों का निपटारा रुका पट्टों के संबंध में यह भी जानकारी मिली है कि राजकीय भूमि और कच्ची बस्तियों के नियमन पर उच्च न्यायालय की रोक के कारण कई बस्तियों में पट्टे जारी नहीं हो पा रहे हैं। यह स्थिति भी आमजन की परेशानी का एक प्रमुख कारण है। आयुक्त का पद रिक्त होने के कारण शिविरों में आए बड़ी संख्या में आवेदनों का निपटारा रुका हुआ है। यदि आयुक्त पद पर किसी अधिकारी की नियुक्ति की जाती है, तो आमजन को राहत मिल सकेगी। नगर परिषद में स्थायी आयुक्त न होने से शहर के कई विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं और कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे शहर के विकास को गति नहीं मिल पा रही है। झालावाड़ नगर परिषद के पूर्व पार्षद रमजान खान ने बताया कि पट्टे की फाइलें बनाने में स्टांप और ज़ेरॉक्स सहित अन्य खर्च होते हैं। आमजन अपना समय निकालकर काम के लिए आते हैं, लेकिन उनके काम समय पर नहीं हो पाते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनदेखी के कारण शहर में अंधेरा, गंदगी और जानवरों का आतंक बढ़ गया है, जिससे लोगों की मौतें भी हुई हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।