झालावाड़ के कोटा रोड स्थित एक निजी विद्यालय में मंगलवार को स्टूडेंट्स के लिए मोबाइल की लत के दुष्प्रभावों पर एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में बच्चों को मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला का संचालन एसआरजी अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि गुप्ता ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि मोबाइल का सही और सीमित उपयोग लाभदायक होता है, लेकिन इसका अनियंत्रित इस्तेमाल पढ़ाई, नींद, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। मोबाइल की लत के कई नुकसान गिनाए डॉ. गुप्ता के अनुसार विद्यार्थियों में मोबाइल की लत के कारण पढ़ाई में गिरावट, तनाव, एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, नींद की कमी और व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा अधिक स्क्रीन टाइम से गर्दन और पीठ दर्द, सिरदर्द, आंखों पर दबाव, गलत पोस्चर और शारीरिक गतिविधियों में कमी जैसी शारीरिक समस्याएं भी सामने आती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल की लत से बचने के लिए स्क्रीन टाइम तय करने, पढ़ाई के दौरान फोन दूर रखने, सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद करने, मेडिटेशन करने, परिवार और दोस्तों के साथ बिना स्क्रीन के समय बिताने, आउटडोर खेल खेलने, किताबें पढ़ने और नई रुचियां विकसित करने की सलाह दी। कार्यशाला में साइबर क्राइम, ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और उनसे बचाव के उपायों की भी जानकारी दी गई। छोटे-छोटे प्रयोगों और उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीक का समझदारी, जिम्मेदारी और संयम के साथ उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।