कोटा में पेट दर्द की शिकायत पर इलाज के लिए हॉस्पिटल आए युवक की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप हुए सीएचसी (CHC) प्रभारी को शिकायत दी है। मामला सीएमएचओ तक पहुंचा, तो सीएमएचओ ने ड्यूटी डॉक्टर को हटाकर दूसरी जगह लगा दिया। घटना जिले के सुल्तानपुर की है। सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया-मामले में जांच के लिए तीन सदस्य कमेटी गठित की है। जांच पूरी होने तक डॉ.दीपक बैरवा को सुल्तानपुर सीएससी से हटा दिया है। उन्हें बीसीएमओ रामगंजमंडी मुख्यालय लगाया है। सुल्तानपुर निवासी नरेंद्र दाधीच ने बताया- नौताड़ा गांव निवासी हर्षित दाधीच (21) एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था। उसकी बुधवार रात को तबीयत बिगड़ी थी। परिजन रात करीब ढाई बजे उसे सुल्तानपुर अस्पताल लेकर आए। वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉ. दीपक बैरवा ने सोते हुए कर्मचारियों से बोलकर उसे ड्रिप चढ़ाने के लिए कहा। इस बीच हर्षित की तबीयत और बिगड़ती चली गई। जब परिजन डॉक्टर को बुलाने उनके कमरे में गए, तो डॉक्टर ने कहा कि वह आ रहे हैं, लेकिन वे नहीं आए। क्वार्टर में चार बार सूचना देने के बाद भी ड्यूटी डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। इसके बाद इलाज न मिलने पर मजबूरन परिजन हर्षित को वापस घर ले गए। सुबह 6 बजे हर्षित को लेकर परिजन वापस अस्पताल पहुंचे, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने उसे चेक कर मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने अस्पताल प्रभारी को लिखित शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। जवान बेटे की मौत से पूरा परिवार सदमे में है और फिलहाल बातचीत करने की स्थिति में नहीं है। रात को इलाज के बाद घर ले गए थे परिजन, सुबह मृत हालत में लाए सीएचसी प्रभारी डॉ. श्याम मालव ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत पर परिजन हर्षित को दिखाने रात करीब ढाई बजे अस्पताल आए थे। उस समय डॉ. दीपक बैरवा ड्यूटी पर तैनात थे, जिन्होंने मरीज की जांच कर उसे ड्रिप और इंजेक्शन लगाया था। थोड़ा आराम मिलने पर परिजन मरीज को लेकर खुद घर चले गए थे। घर जाने के बाद मरीज को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। सुबह करीब साढ़े 6 बजे परिजन उसे लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचे, जहां जांच करने पर डॉक्टर ने उसे मृत (ब्रॉट डेड) घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने शव का पोस्टमार्टम कराने को कहा, लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए। जांच के लिए उच्च अधिकारियों को भेजी गई शिकायत सीएचसी प्रभारी ने ड्यूटी डॉक्टर पर एक घंटे तक मरीज को न संभालने के आरोपों को पूरी तरह निराधार और गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसर में ही डॉक्टर का क्वार्टर है और सूचना मिलते ही डॉक्टर तुरंत मौके पर पहुंचे थे। वहीं, मृतक के भाई चेतन ने अस्पताल स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने की लिखित शिकायत दी है। इस शिकायत को निष्पक्ष जांच और आगामी कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है।