झालावाड़ शहर में बेसहारा गोवंश और आवारा स्वानों की बढ़ती संख्या अब आमजन के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। मुख्य मार्गों, बाजारों और कॉलोनियों में दिनभर घूमते गोवंश यातायात बाधित कर रहे हैं और उनके आपसी संघर्ष से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। वहीं, आवारा स्वानों के भौंकने और काटने की घटनाओं से बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी भय में हैं। लगातार बढ़ रही इस समस्या के बीच शहरवासियों ने नगर परिषद से गोवंशों को गौशालाओं में पहुंचाने और आवारा स्वानों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है। पार्किंग में खड़ी कार को पहुंचाया नुकसान बालाजी रोड निवासी अरशद ने बताया कि कुछ दिन पहले दो बेसहारा गोवंश आपस में लड़ते-लड़ते सड़क किनारे पार्किंग में खड़ी उनकी कार से टकरा गए। हादसे में कार के शीशे टूट गए और वाहन को काफी नुकसान पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि उस समय कार के पास कोई व्यक्ति मौजूद होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। बाजारों और चौराहों पर बढ़ी परेशानी शहरवासियों का कहना है कि बेसहारा गोवंशों के अचानक सड़क पर आ जाने और आपस में भिड़ने से दोपहिया वाहन चालकों को कई बार अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं। व्यस्त बाजारों और प्रमुख चौराहों पर इनका जमावड़ा यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। आवारा स्वानों से बच्चों और बुजुर्गों में डर शहर के विभिन्न इलाकों में आवारा स्वानों का आतंक भी लगातार बढ़ रहा है। छोटे बच्चों और राहगीरों पर भौंकने तथा काटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सुबह-शाम स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में इनके कारण असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थायी समाधान की उठी मांग स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक इसके स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। नागरिकों ने नगर परिषद और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से बेसहारा गोवंशों को गौशालाओं में पहुंचाने तथा आवारा स्वानों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके और संभावित हादसों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।