कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को पहचान देने और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र, झालावाड़ में महिला किसान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में महिला किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पोषण वाटिका और खाद्य प्रसंस्करण की जानकारी दी गई। इस दौरान सुनेल ब्लॉक की कृषि सखी प्रियंका नागर ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि छोटे स्तर पर मनिहारी व्यवसाय शुरू कर वह आज सालाना 5 लाख रुपए का टर्नओवर प्राप्त कर रही हैं। विशेषज्ञों ने महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने और कृषि आधारित आजीविका के नए अवसर अपनाने के लिए प्रेरित किया। फसल उत्पादन से पशुपालन तक महिलाओं की अहम भूमिका केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष झाझड़िया ने कहा कि महिलाएं फसल उत्पादन, बीज संरक्षण, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अहम है। उन्होंने महिला किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकें अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया। पोषण वाटिका और खाद्य प्रसंस्करण से बढ़ेगी आय केंद्र की गृह विज्ञान विषय विशेषज्ञ एवं कार्यक्रम प्रभारी डॉ. तुलिका आचार्य ने कहा कि महिला किसान परिवार की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी योगदान देती हैं। उन्होंने महिलाओं को संतुलित आहार, पोषण वाटिका, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण और मूल्य संवर्धन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय कृषि उत्पादों की छंटाई, श्रेणीकरण और प्रसंस्करण के माध्यम से महिलाएं अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकती हैं। तकनीकी प्रशिक्षण से उनके स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित कर आय बढ़ाने के लिए भी प्रेरित किया। स्वयं सहायता समूहों से आत्मनिर्भर बनें महिलाएं राजीविका झालावाड़ की जिला प्रबंधक गीतांजलि रजक ने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से महिलाएं सामूहिक प्रयासों से आजीविका के नए अवसर विकसित कर सकती हैं। उन्होंने महिला किसानों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की अपील की। मनिहारी व्यवसाय से सालाना 5 लाख रुपए का टर्नओवर कार्यक्रम में सुनेल ब्लॉक की कृषि सखी प्रियंका नागर ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने छोटे स्तर पर मनिहारी व्यवसाय शुरू किया था और आज वह इससे सालाना 5 लाख रुपए का टर्नओवर प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने महिला किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियां, जैविक खेती और कृषि आधारित आजीविका गतिविधियां अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रियंका ने कहा कि कृषि सखियां ग्रामीण स्तर पर किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। आधुनिक तकनीक और नए आजीविका अवसर अपनाने का संदेश कार्यक्रम का समापन महिला किसानों के योगदान को पहचान देने, उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों एवं पोषण प्रबंधन से जोड़ने और आजीविका के नए अवसर अपनाने के संदेश के साथ हुआ। इस दौरान केंद्र के डॉ. मोहम्मद यूनुस, डॉ. हितेश मुवाल, सुनीता कुमारी, शाहरुख खान सहित विभिन्न कृषि महाविद्यालयों से आए विद्यार्थी उपस्थित रहे।