झुंझुनूं के जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अखिल राजस्थान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त विकास संघर्ष समिति के बैनर तले कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर जबरदस्त आक्रोश जताया। सहायिकाओं ने कलेक्ट्रेट पर करीब एक घंटे तक लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन किया। भीषण गर्मी और उमस के कारण एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौके पर ही बेहोश हो गई, जिसे साथी कार्यकर्ताओं ने संभाला। हमे भीड़ जुटाने की मशीन समझा प्रदर्शन कर रही कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्थानीय राजनेताओं की कार्यप्रणाली पर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा- हमें सिर्फ भीड़ जुटाने की मशीन समझ लिया गया है। चाहे कोई मुख्यमंत्री का कार्यक्रम हो, कोई अन्य नेता आए या फिर किसी विधायक का जन्मदिन ही क्यों न हो, हर जगह भीड़ दिखाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ही ड्यूटी पर बुला लिया जाता है। 10 हजार में घर चलाना नामुमकिन कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जताते हुए कहा- हमसे विभाग के मूल काम के अलावा दुनिया भर के गैर-आईसीडीएस (Non-ICDS) काम करवाए जाते हैं, लेकिन महीने के अंत में मानदेय के नाम पर सिर्फ 10 हजार रुपए थमा दिए जाते है। इतने कम वेतन में इस महंगाई के दौर में परिवार पालना नामुमकिन हो गया है। कलेक्टर को बुलाया जाए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में जबरदस्त आक्रोश था। जब कलेक्ट्रेट के अंदर प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) ने बाहर आकर बताया- जिला कलेक्टर ने मांगों को आगे भिजवाने और सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है, तो प्रदर्शनकारी महिलाएं भड़क गईं। उन्होंने आश्वासन को ठुकराते हुए कहा कि हम अंदर के बंद कमरों के आश्वासन को नहीं मानेंगे, जिला कलेक्टर को नीचे हमारे सामने कलेक्ट्रेट परिसर में धूप में खड़ा करो, हम खुद अपनी पीड़ा सुनाएंगे। भारी पुलिस जाब्ता तैनात उग्र प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट घेराव की स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए डिप्टी एसपी गोपाल ढाका, कोतवाली थानाधिकारी श्रवण कुमार सहित पुलिस की विशेष 'कालिका टीम और भारी संख्या में पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके मांगे नहीं मानने पर आंदोलन की चेतावनी प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र फौजी ने कहा- यह तो सिर्फ शुरुआत है, अगर सरकार ने हमारी जायज मांगों पर तुरंत निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में जिले भर में इससे भी बड़ा उग्र प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा। नाहिदा कुरैशी और सरोजनी ने दो टूक शब्दों में कहा, हमारा मानदेय कम से कम 35,000 होना चाहिए, 10,000 रुपए में आज के समय में क्या होता है। तस्वीरों में देखिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का विरोध… मांग पत्र की प्रमुख पांच बड़ी मांगे संघर्ष समिति की ओर से जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम सौंपे गए 11 सूत्रीय मांग पत्र में यह प्रमुख मांगें शामिल हैं।