मुख्यमंत्री निःशुल्क (फ्री) निरोगी राजस्थान योजना के तहत सरकारी हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों को एक ही जगह दवाएं देने का दावा अधूरा रह गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के पीआईपी के तहत प्रदेशभर में 500 नए दवा वितरण केंद्र बनाने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन इनमें से करीब 100 केंद्र अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। वित्तीय साल 2024-25 में मंजूर हुए इन केंद्रों का काम जमीन नहीं मिलने और निर्माण में देरी के कारण अटका हुआ है। इसका असर यह है कि मरीजों को आज भी दवा लेने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है और उन्हें योजना का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। वित्तीय साल 2024-25 में मंजूर हुए थे नए केंद्र मुख्यमंत्री निःशुल्क (फ्री) निरोगी राजस्थान योजना के तहत मरीजों की सुविधा के लिए एनएचएम के पीआईपी में प्रदेशभर में 500 नए दवा वितरण केंद्र मंजूर किए गए थे। इनमें से करीब 100 केंद्र अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। जिले सहित पूरे प्रदेश में जमीन नहीं मिलने और निर्माण में ढिलाई के कारण इन केंद्रों का काम रुका हुआ है। झुंझुनूं में 15 जगहों पर अटका काम झुंझुनूं जिले के ग्रामीण और कस्बाई इलाके में 16 जगहों पर नए दवा वितरण केंद्र प्रस्तावित हैं। इनमें बाकरा, देरवाला, भीमसर, भोजासर, चूडैला, डूलानियां, गोवाला, लाम्बा गोठड़ा, सराय, सारी, सोनासर, मढोगढ़ और नालपुर शामिल हैं। वहीं जिला मुख्यालय के बीडीके हॉस्पिटल सहित कई बड़े चिकित्सा संस्थानों में या तो जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है या निर्माण का काम बीच में अटका हुआ है। यूसी नहीं भेज पाने से आगे के फंड की चिंता इस देरी का असर योजना के काम और आगे मिलने वाले बजट पर भी पड़ रहा है। नियम के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग को सभी दवा वितरण केंद्रों का निर्माण पूरा कर भारत सरकार को उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) भेजना था। लेकिन जमीन से जुड़े विवाद और प्रशासनिक कारणों से यह काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। अब विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित केंद्रों के लिए जल्द जमीन उपलब्ध कराना है, ताकि केंद्र सरकार से मिलने वाले अगले फंड पर कोई असर नहीं पड़े। इसके लिए विभाग उन चिकित्सा संस्थानों की सूची तैयार कर रहा है, जहां जमीन की कमी है, ताकि कोई दूसरा समाधान निकाला जा सके। पुराने काउंटरों पर बढ़ रही भीड़ सरकार का उद्देश्य था कि मरीजों को एक ही परिसर में बिना परेशानी के तुरंत दवाएं मिल जाएं और उन्हें इधर-उधर नहीं जाना पड़े। लेकिन नए दवा वितरण केंद्र समय पर तैयार नहीं होने से यह व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जिन हॉस्पिटल में नए भवन बनने थे, वहां अभी भी पुराने और कम जगह वाले काउंटरों से ही दवा दी जा रही है। मरीजों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार नए केंद्र शुरू नहीं होने से मरीजों को दवा लेने के लिए भीषण गर्मी और भीड़ के बीच घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें इलाज के साथ दवा लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।