अचानक बदले मौसम ने नवलगढ़ और गुढ़ागौड़जी क्षेत्र में ऐसी तबाही मचाई कि महीनों की मेहनत मिनटों में मलबे में तब्दील हो गई। तेज अंधड़, बिजली की गड़गड़ाहट और फिर शुरू हुई भीषण ओलावृष्टि ने खेतों का मंजर पूरी तरह बदल दिया। खेतों में बिछी सफेद चादर, बेर से बड़े ओले नवलगढ़ क्षेत्र के देवीपुरा बणी, खिरोड़, टोंकछिलरी, मोहनबाड़ी, बारवा, और अंबेडकर नगर जैसे गांवों में कुदरत का सर्वाधिक कहर देखने को मिला। वहीं गुढ़ागौड़जी, पोसाणा, खीवांसर, बजावा और छऊ गांवों में भी जमकर ओले गिरे। स्थानीय लोगों के अनुसार, ओलों का आकार बेर से भी बड़ा था। जहां एक दिन पहले फसलें लहलहा रही थीं, वहां अब सिर्फ सफेद ओलों की मोटी परत और टूटी हुई फसलें नजर आ रही हैं। प्याज, गेहूं और मिर्च को सबसे ज्यादा नुकसान शुरुआती आकलन के अनुसार, कई गांवों में 30% से 70% तक फसलें तबाह हो चुकी हैं। प्याज और मिर्च: ओलों की मार से प्याज की फसल पूरी तरह जमीन में धंस गई है। गेहूं और जौ: खड़ी फसलें तेज हवा और ओलों से टूटकर गिर गईं, जबकि कटी हुई फसलें पानी में डूबने से सड़ने के कगार पर हैं। सब्जियां: मिर्च और अन्य हरी सब्जियों के पौधों के सिर्फ डंठल बचे हैं। नवलगढ़, गुढा इलाकों बड़ा नुकसान कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेंद्र लांबा ने बताया कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं को भारी नुकसान हुआ है। नवलगढ़ पंचायत समिति के गांवों में इसका व्यापक असर है। कटी हुई फसलों (चना, जौ, गेहूं) के दाने काले पड़ सकते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों गिर जाएंगे। अब कर्ज कैसे चुकाएंगे खेतों में अपनी बरबादी देख रहे किसानों की आंखों में आंसू हैं। देवीपुरा के किसान जोधराम फागणा भावुक होकर कहते हैं कि खेत में फसल नहीं, हमारे साल भर के सपने बिछे पड़े हैं। किसी को बेटी की शादी करनी थी, तो किसी को बैंक का कर्ज चुकाना था। अब घर का खर्च कैसे चलेगा, यही सबसे बड़ी चिंता है। ग्रामीणों ने अब सरकार और प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द विशेष गिरदावरी करवाकर खराबे की रिपोर्ट तैयार की जाए और उचित मुआवजा दिलाया जाए। नुकसान की सूचना जल्द दें प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे कागजी कार्रवाई में देरी न करें। यदि आपकी फसल को नुकसान हुआ है, इसकी सूचना जल्द दें। ओलावृष्टि के 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी या कृषि विभाग को सूचना देना अनिवार्य है। क्रॉप इंश्योरेंस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से ऐप को डाउनलोड करें और अपने खराब हुए खेत की फोटो सीधे अपलोड करें। टोल-फ्री नंबर 14447 या वॉट्सऐप चैटबॉट 7065514447 पर अपनी शिकायत दर्ज करवाएं।