राजस्थान में संस्कृत शिक्षा के गिरते स्तर और ‘शून्य नामांकन’ की स्थिति को देखते हुए विभाग ने बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदेश के 76 संस्कृत स्कूलों को बंद कर उन्हें अन्य स्थानों पर शिफ्ट करने के आदेश जारी किए हैं। इस फैसले के तहत झुंझुनूं जिले के तीन स्कूल भी प्रभावित हुए हैं, जिनका अब स्थान बदल दिया गया है। हालांकि, इस निर्णय के खिलाफ शिक्षकों और संगठनों का विरोध भी शुरू हो गया है। पुराने गांवों से हटेंगे स्कूल संस्कृत शिक्षा विभाग की आयुक्त प्रियंका जोधावत के निर्देशानुसार इन स्कूलों की ‘पुनर्संरचना’ की जा रही है। इसका अर्थ है कि जिन स्कूलों में लंबे समय से एक भी छात्र नामांकित नहीं था, उन्हें अब ऐसे स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है जहां नामांकन की संभावना अधिक हो। इससे इन स्कूलों का भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा और ये अपने पुराने गांवों में संचालित नहीं होंगे। झुंझुनूं के तीन स्कूलों का बदला स्थान विभाग ने झुंझुनू जिले के तीन संस्कृत स्कूलों का स्थान परिवर्तन किया है। राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय, देलसरकला को अब चिड़ावा ब्लॉक के ‘जोधा का बास’ (ग्राम पंचायत नारी) में शिफ्ट किया गया है। वहीं, राजकीय प्राथमिक संस्कृत विद्यालय, डूमोली खुर्द को उदयपुरवाटी नगरपालिका के वार्ड नंबर 02 में स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा, राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय, मिश्रपुरा (बिंजूसर) को गुढ़ागौड़जी स्थित ‘जोगियों की पोली’ में संचालित संस्कृत पाठशाला में भेजा गया है। 1 अप्रैल से नए पते पर शुरू हुआ सत्र विभागीय आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही ये सभी स्कूल अपने नए स्थानों पर संचालित होने लगे हैं। सहायक निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि इन स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और पदों का आवंटन तुरंत किया जाए। साथ ही, स्कूलों की पुरानी NIC आईडी यथावत रहेगी, लेकिन स्थान परिवर्तन के कारण UDISE कोड को अपडेट किया जाएगा। फैसले के खिलाफ उठे सवाल- ‘स्कूल हटाना समाधान नहीं’ विभाग के इस फैसले का विरोध भी तेज होने लगा है। प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल-प्रथम) के स्टेट चेयरमैन खेमराज मीणा ने इस निर्णय को गलत बताते हुए कहा कि स्कूलों को बंद करना या शिफ्ट करना समस्या का समाधान नहीं है। उनका कहना है कि विभाग को इन क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति करनी चाहिए थी और नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों को हटाना शिक्षा के अधिकार (RTE) के प्रावधानों के विपरीत है।