झालावाड़ जिले में सोमवार दोपहर दो अलग-अलग सड़क हादसों ने खुशियों को मातम में बदल दिया। शादी समारोह में जा रहे लोगों से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अनियंत्रित होकर पलट गईं। दोनों हादसों में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार गंभीर घायलों को आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। पहला हादसा: नाहरडी के पास मचा हड़कंप पहला हादसा नाहरडी क्षेत्र के पास हुआ, जहां शादी में जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक संतुलन बिगड़ने से पलट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के ग्रामीण तुरंत मदद के लिए पहुंचे और घायलों को ट्रॉली से बाहर निकालकर झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल भिजवाया। दूसरा हादसा: बोरबंद क्षेत्र में ट्रॉली पलटी दूसरा हादसा बोरबंद क्षेत्र में हुआ, जहां एक अन्य ट्रैक्टर-ट्रॉली असंतुलित होकर पलट गई। बताया जा रहा है कि दोनों ट्रॉलियों में मिलाकर चार दर्जन से अधिक लोग सवार थे। इन हादसों में कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। घायलों का इलाज जारी, एक की मौत दोनों हादसों में घायल हुए लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान एक घायल ने दम तोड़ दिया। वहीं चार अन्य गंभीर घायलों को आईसीयू में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। वसुंधरा राजे ने लिया हालचाल राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हादसे में घायल लोगों का हालचाल ऑनलाइन जाना। मंडल अध्यक्ष प्रदीप सिंह राजावत के अनुसार, उन्होंने मोबाइल के माध्यम से घायलों के परिजनों से बातचीत की। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय पोरवाल और उप अधीक्षक डॉ. सुमित हाड़ा ने घायलों की स्थिति की जानकारी दी। मौके पर भाजपा नेता सियाराम अग्रवाल, नारायण सिंह, पूर्व पार्षद इनाम जफर, राकेश भील, अनिल सुमन, सूरज हाड़ा, चेतन शर्मा, अजय प्रधान, शुभम अग्रवाल, पवन बैरवा और कुलदीप सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। विधायक सुरेश गुर्जर ने की मुआवजे की मांग खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर भी हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों का हालचाल जाना और सरकार से मृतक के परिजनों व घायलों को आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवारी ढोने पर सख्ती से रोक लगाने की आवश्यकता भी जताई। बढ़ती लापरवाही पर उठे सवाल इन दोनों हादसों ने एक बार फिर ट्रैक्टर-ट्रॉली में लोगों की आवाजाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर यात्रा करना अक्सर हादसों की वजह बन रहा है, बावजूद इसके इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।