जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की गुरुवार को सिंडीकेट हुई। बैठक में विश्वविद्यालय का 295 करोड़ का बजट पारित किया गया। वहीं, पीएचडी ऑर्डिनेंस में संशोधन कर प्रस्ताव को फिर से राज्य सरकार को भेजने का फैसला किया गया। जबकि शिक्षकों से के पदोन्नति से जुड़ा फैसला फिलहाल टाल दिया गया। सिंडिकेट की बैठक में पीएचडी ऑर्डिनेंस में संशोधन कर प्रस्ताव को फिर से राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। सरकार से स्वीकृति मिलने पर करीब चार साल से विश्वविद्यालय में अटकी पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकेगी। शिक्षकों के पदोन्नति पर नहीं लिया फैसला सिंडिकेट की बैठक में विश्वविद्यालय में 2012-13 की शिक्षक भर्ती से जुड़े चार टीचर्स के प्रमोशन का फैसला टाल दिया गया। बैठक में पदोन्नति से जुड़े सीलबंद लिफाफे खोलने का एजेंडा था। लेकिन बैठक में सदस्यों ने कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक इंतजार करना उचित माना। मामला हाईकोर्ट में लंबित होने और अवमानना याचिका दायर होने के चलते प्रशासन सतर्क रुख में है। दरअसल, 2012-13 में नियुक्त 111 असिस्टेंट प्रोफेसरों में से अधिकांश को दो-दो पदोन्नतियां मिल चुकी हैं, जबकि डॉ. राजेंद्र सिंह खींची, डॉ. मनीष वडेरा, डॉ. ऋषभ गहलोत और डॉ. विवेक अब तक प्रमोशन से वंचित हैं। इसी असमानता को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा, जिसके बाद यह विषय सिंडीकेट के एजेंडे में शामिल हुआ। बैठक में सहमति बनी कि विधिक राय आने के बाद ही स्टेज-1 से स्टेज-2 प्रमोशन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सिंडीकेट ने 295 करोड़ रुपए का वार्षिक बजट भी पारित किया। बजट पारित होने के बाद विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद बंधी है।