जोधपुर एम्स में शनिवार को वार्ड में आग लगने की मॉक ड्रिल की गई। अचानक लगी आग की सूचना से एक बारगी अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। जैसे ही मौके पर बचाव टीमें पहुंचीं, तब पता चला कि यह फायर सेफ्टी को लेकर की गई एक मॉक ड्रिल थी। दरअसल, एम्स जोधपुर में फायर सेफ्टी सुरक्षा सप्ताह मनाया गया। इसी के तहत शनिवार को आयोजित इस मॉक ड्रिल में आपदा के समय मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारियों को परखा गया। इस अभ्यास में एसडीआरएफ (SDRF) के जवान, नगर निगम, सिविल डिफेंस और एम्स का सिक्योरिटी डिपार्टमेंट शामिल रहा। रस्सी के सहारे रेस्क्यू और खिड़कियां काटकर बनाया रास्ता एसडीआरएफ (SDRF) कमांडेंट राजेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में प्लाटून कमांडर अदिति बेनीवाल की टीम ने एम्स की बिल्डिंग में रेस्क्यू का हैरतअंगेज अभ्यास किया। मॉक ड्रिल के दौरान यह मान लिया गया कि आग के कारण सीढ़ियां और दरवाजे ब्लॉक हो गए हैं। ऐसी स्थिति में टीम ने रस्सी की सहायता से ऊंचाई से मरीजों को नीचे उतारने का अभ्यास किया। साथ ही, अवरुद्ध रास्तों के विकल्प के तौर पर खिड़कियों की कटिंग कर मरीजों को बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस के जरिए दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक परखा गया। 'सुरक्षित अस्पताल-सुरक्षित रोगी' की थीम पर फायर सेफ्टी वीक एम्स के मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ. अभिषेक भारद्वाज ने बताया कि एम्स जोधपुर में वर्तमान में 'फायर सेफ्टी वीक' मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम 'सुरक्षित अस्पताल, सुरक्षित रोगी और सुरक्षित कर्मचारी' रखी गई है। इसी अभियान के तहत आज इस मॉक ड्रिल का आयोजन कर अस्पताल की तैयारियों को जांचा गया। अभ्यास में हेड कांस्टेबल हंसराज, गणपत राम, हनुमान सहित 23 सदस्यीय टीम ने अपने तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। घरेलू गैस सिलेंडर से बचाव के बताए तरीके रेस्क्यू ऑपरेशन के सफल समापन के बाद टीम ने वहां मौजूद स्टाफ और आमजन को घरेलू गैस सिलेंडर में आग लगने की स्थिति में बचाव के तरीके सिखाए। इसमें आग बुझाने की तकनीकों का प्रदर्शन किया गया ताकि आपातकालीन स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके। इस अवसर पर नर्सिंग ऑफिसर सुरेश शर्मा, SE चंद्रेश पारीक, XEN पंकज शर्मा, असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर नीतीश चौधरी और SFJ प्रमोद सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।