जोधपुर में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। बड़े भाई ने अपने सगे छोटे भाई की पत्नी से रेप किया। वहीं दूसरे छोटे भाई की पत्नी से रेप की कोशिश की। मामले में कोर्ट ने दोषी जेठ को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं 85,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। दोषी को सजा दिलाने में उसकी मां अहम गवाह बनी। मामला 2021 का है। सजा का फैसला शनिवार (4 अप्रैल) को जोधपुर के विशेष न्यायालय (पोक्सो कोर्ट) के पीठासीन न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने सुनाया है। कोर्ट ने कहा- बिना दंड के समाज में फैलेगी अराजकता जज डॉ. दुष्यंत दत्त ने अपने 54 पन्नों के फैसले में 'श्रीरामचरितमानस', 'मनुस्मृति' और 'बृहस्पति-स्मृति' के श्लोकों का विस्तार से उल्लेख किया। कोर्ट ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए लिखा- "दण्डः शास्ति प्रजाः सर्वाः दण्ड एवाभिरक्षति" (अर्थात दंड ही समस्त प्रजा पर शासन करता है और रक्षा करता है)। कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति भाई की पत्नी पर कुदृष्टि डालता है, वह अत्यंत दुष्ट है। कोर्ट ने माना कि बिना दंड के समाज में 'मत्स्य-न्याय' (बड़ी मछली का छोटी मछली को खाना) व्याप्त हो जाएगा। 'लोकलाज' के डर ने बढ़ाया अपराधी का हौसला पीड़ित पक्ष के अनुसार- 10 मार्च 2021 को दोपहर करीब ढाई बजे पहली पीड़िता खेत में बनी ढाणी से शौच के लिए बाहर गई थी। तभी आरोपी जेठ ने पीछे से आकर उसे दबोच लिया और रेप किया। आरोपी रिश्ते में पीड़िता का सगा जेठ लगता था, इसलिए पीड़िता ने 'लोकलाज' के डर से यह बात किसी को नहीं बताई। इस चुप्पी का फायदा उठाकर आरोपी के हौसले इतने बढ़ गए कि उसने चार महीने बाद, 4 जुलाई 2021 की रात अपने दूसरे छोटे की पत्नी से भी रेप की कोशिश की। सास के पास सो रही थी बहू, तब की रेप की कोशिश 4 जुलाई की रात दूसरी पीड़िता अपनी सास (आरोपी की मां) के पास सो रही थी। तभी आरोपी पहुंचा और उसके साथ रेप की कोशिश करने लगा। पीड़िता के चिल्लाने पर उसकी सास ने तुरंत बीच-बचाव किया, जिससे घबराकर आरोपी वहां से भाग गया। इस दूसरी घटना के बाद 6 जुलाई 2021 को पीपाड़ शहर थाने में मामले में पहली बार पुलिस एफआईआर दर्ज करवाई गई। बेटे के खिलाफ मां ने दी गवाही सरकारी वकील नरपत चौधरी ने बताया कि मामले में दोषी पीपाड़ शहर के एक गांव का रहने वाला 52 साल का व्यक्ति है। कोर्ट में 12 मौखिक और 15 डॉक्यूटमेंट सबूत पेश किए। इस प्रकरण की अहम गवाह दोषी की मां थी। कोर्ट में तर्क दिया कि मां प्रकृति की एकमात्र ऐसी प्राणी है जो बच्चों की ढाल बनती है, लेकिन जब बेटा ही पशुवत हो जाए, तो मां ने अपनी कोख से जन्मे बेटे के खिलाफ पुत्रमोह से ऊपर उठकर सत्य और धर्म के पक्ष में अडिग गवाही दी। खुद मां ने अपनी सशपथ साक्ष्य में स्वीकार किया कि उसका बेटा एक शराबी और आदतन अपराधी है। कोर्ट का फैसला: अलग-अलग धाराओं में कठोर दंड कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी को पारिवारिक मर्यादा को तार-तार करने का दोषी माना। कोर्ट ने उसे धारा 376(2)(एफ) के तहत 10 साल का कठोर कारावास व 50,000 रुपए जुर्माना और धारा 354 (लज्जाभंग) के तहत 3 साल का कठोर कारावास व 10,000 रुपए जुर्माना लगाया है। इसके अलावा धारा 376 सपठित धारा 511 (रेप का प्रयास) के तहत 5 साल का कठोर कारावास व 25,000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी सजा साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट ने दोनों पीड़िताओं को अविलंब प्रतिकर दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अनुशंसा भी की है।