राजस्थान हाईकोर्ट ने निजी आवासीय टाउनशिप में बुनियादी सुविधाएं डवलप किए बिना पट्टे जारी किए जाने के आरोपों पर जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से एक सप्ताह में विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2010 की नीति के तहत सड़क, पानी और बिजली जैसी न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना सभी पट्टे जारी नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने कहा- यदि जवाब समय पर दाखिल नहीं किया तो जेडीए सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ में नवल किशोर शर्मा और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। आरोप- बिना डवलपमेंट के पट्टे किए जारी याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि संबंधित टाउनशिप के डवलपर ने वर्ष 2010 की आवासीय योजना नीति के अनुरूप आंतरिक विकास कार्य पूरे नहीं किए, फिर भी भूखंडों के पट्टे जारी किए जा रहे हैं। खंडपीठ ने कहा- नीति के अनुसार विक्रय योग्य 87.5 प्रतिशत भूखंडों के पट्टे तभी जारी किए जा सकते हैं, जब सड़क, पेयजल और बिजली जैसी न्यूनतम आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। शेष 12.5 प्रतिशत भूखंडों की बिक्री और पट्टे आंतरिक विकास कार्य पूरी तरह पूरा होने के बाद ही संभव है। कोर्ट ने जेडीए को निर्देश दिए कि वह बताए कि अब तक कितने प्रतिशत पट्टे जारी किए जा चुके हैं, कितने लंबित हैं, टाउनशिप में विकास कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है। डवलपर ने नीति के तहत निर्धारित सभी शुल्क जमा किए हैं या नहीं।