राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने एक विधवा महिला जमना देवी की जमीन से जुड़े विवाद में अहम हस्तक्षेप करते हुए संबंधित भूमि पर स्टे लगा दिया है। मामला ‘आर्क बाय मूंदड़ा डेवलपर्स’ प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां फर्म पर खातेदार की जमीन अपने नाम कराने के आरोप लगे हैं। कोर्ट के इस फैसले से महिला को फिलहाल राहत मिली है, वहीं पूरे प्रोजेक्ट पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, हाईकोर्ट ने उदयपुर के एक भूमि विवाद से जुड़े मामले में अंतरिम राहत देते हुए विवादित जमीन पर किसी भी तीसरे पक्ष के अधिकार सृजित करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई के दौरान यह रोक लगाई है। द आर्क बाय मूंदड़ा डेवलपर्स द्वारा इसी विवादित जमीन पर अपार्टमेंट बनाया जा रहा है, जिस पर भी यथास्थिति के आदेश दिए गए है। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित भूमि पर याचिकाकर्ता जमनादेवी पत्नी स्व. छोगालाल लौहार खातेदार है। यह भूमि एक पार्टनरशिप फर्म में सरेंडर की जा चुकी है। मामले में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 90-ए के तहत की गई कार्रवाई के खिलाफ याचिकाकर्ता ने अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, उदयपुर के समक्ष अपील दायर की थी, जिसे 30 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया गया था। इस अपील के खारिज होने के बाद शोभागपुरा के शिव कॉलोनी निवासी विधवा महिला जमनादेवी ने हाईकोर्ट गई। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया याचिका को सुनवाई योग्य (लोकस स्टैंडी) मानते हुए इसे स्वीकार किया और प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का तीसरे पक्ष का अधिकार नहीं बनाया जाएगा और यथास्थिति का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता महिला ने सी कंस्ट्रक्शन नामक फर्म के साथ-साथ राज्य सरकार, यूडीए सचिव, उद्वोग विभाग उदयपुर के महाप्रबंधक, उदयपुर के अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर उदयपुर और बड़गांव तहसीलदार को भी पार्टी बनाया है। अब विस्तार से समझिए पूरा मामला शोभागपुरा के शिव कॉलोनी निवासी विधवा महिला जमना देवी ने राजस्त्र ग्राम भुवाणा और पटवार मण्डल भुवाणा में वर्तमान आराजी नम्बर-4462/3602 रकबा 0.5400 हैक्टेयर भूमि जिसके खातेदारी अधिकार खुद के नाम होने के बाद उन्होंने राजस्थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम 1959 के तहत मैसर्स सी कन्सट्रक्शन को मात्र उद्योग लगाए जाने के लिए अनापत्ति दी थी। महिला की याचिका के अनुसार, इसके बाद उक्त फर्म के भागीदारों ने राजस्व कार्मिकों से मिलीभगत कर लीज के इन्द्राज को खातेदारी के रूप मे गलत इन्द्राज करवा लिया एवं सारभूत तथ्यों को छिपाए। याचिका में महिला ने बताया कि तत्कालीन उदयपुर जिला कलेक्टर के समक्ष राजस्थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम 1959 के नियम 14 (1) के तहत उक्त भूमियों को सी कन्सट्रक्शन के द्वारा स्वयं की खातेदारी होना बताकर औद्योगिक लीज डीड को निरस्त करवा दी गई। जबकि मूल खातेदार के रूप में वापस नियमानुसार लीज निरस्त होने पर जमीन पुन: महिला के नाम दर्ज की जानी थी। महिला ने उदयपुर कलेक्टर को जो अर्जी दी थी, उसमें बताया था कि खातेदारी भूमियां कभी भी किसी भी व्यक्ति को उन्होंने बेचान नहीं की थी। विधि विरूद्ध एवं गलत इन्द्राज के आधार पर सी कंसट्रक्शन ने नगर विकास प्रन्यास उदयपुर से धोखा कर खुद को खातेदार बताते हुए आवंटन पत्र एवं पट्टा विलेख जारी कराने का उल्लेख भी अर्जी में किया। महिला ने अधिकारियों को जो प्रार्थना पत्र दिया, उसमें यह भी बताया कि वर्तमान में उक्त भूमि पर सी' कन्स्ट्रक्शन एवं द आर्क बाय मूंदड़ा डेवलपर्स द्वारा अपार्टमेंट का निर्माण कर विक्रय करने का काम किया जा रहा है जो गलत है।