जोधपुर के स्कूलों में एक अनोखी पहल के तहत जज ‘टीचर’ बनकर बच्चों के बीच पहुंचे और उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे’ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में जजों ने खुद से जुड़े साइबर ठगी के मामलों के अनुभव साझा किए और छात्रों को डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने के तरीके बताए। दरअसल, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) की अनूठी पहल के तहत मंगलवार से प्रदेशभर के स्कूलों में 'युवा सशक्तिकरण कार्यक्रम' की शुरुआत हो चुका है। इस अभियान को 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे' नाम दिया गया है। इसके तहत जोधपुर महानगर के 50 न्यायिक अधिकारियों सहित पूरे राजस्थान के करीब 1400 जज और मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारियों ने क्लासरूम की कमान संभाली। शिक्षा के मंदिरों में अब अदालत के हाकिम स्टूडेंट्स को साइबर सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस वृहद कार्यक्रम का लक्ष्य प्रदेश के 1400 विद्यालयों के 4 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करना है। मुख्य न्यायाधीश की नसीहत पर बनी रूपरेखा इस व्यापक कार्यक्रम की पृष्ठभूमि फरवरी 2026 में जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सम्मेलन से जुड़ी है। इस सम्मेलन में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि "दीर्घकालिक साइबर सुरक्षा के लिए नागरिक शिक्षा सबसे जरूरी हथियार है।" मुख्य न्यायाधीश की इस नसीहत और उनके निर्देशन के बाद राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति संजीव प्रकाश शर्मा ने इसे अप्रूव किया। इसके साथ ही राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भी सभी विभागों को स्कूलों-कॉलेजों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए थे। न्यायपालिका द्वारा शुरू किया गया यह अभियान उसी दिशा में एक बेहद ठोस कदम है। साइबर अपराधों में उछाल, 'कानून की अज्ञानता बचाव नहीं' जोधपुर में इस कार्यक्रम को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश त्यागी के निर्देशन में लागू किया गया है। मदेरणा कॉलोनी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यक्रम के बाद डीएलएसए सचिव राकेश रामावत ने बताया कि विधिक सेवा का उद्देश्य लोगों को सस्ता, सुलभ न्याय और कानूनी जानकारी देना है। रामावत ने कहा कि "आज के जमाने में कोई भी अज्ञानता को अपनी प्रतिरक्षा नहीं बना सकता, 'इग्नोरेंस ऑफ लॉ इज नो डिफेंस'।" उन्होंने बताया कि इंटरनेट की पहुंच आज सड़क पर सफाई करने वाले तक है, जिसके कारण डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़े हैं और साइबर अपराधों में पिछले सालों की तुलना में 400 से 500 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी को रोकने के लिए अब हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को न्यायिक अधिकारी अलग-अलग स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक करेंगे। जज साहब के नाम से बना फर्जी अकाउंट, सहपाठी से ठगे 16 हजार शास्त्री नगर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल (विशिष्ठ पूर्व) में आयोजित कार्यक्रम में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीबीआई) अनुभव तिवाड़ी ने छात्रों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने खुद से जुड़ा एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि किसी साइबर ठग ने उनकी फोटो का इस्तेमाल कर फेसबुक पर एक फेक अकाउंट बनाया और उनके दोस्तों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। सप्ताहभर सामान्य बातचीत के बाद ठग ने फेसबुक पर पोस्ट डाली कि "मेरा मानसिक संतुलन खराब है, इलाज के लिए पैसे नहीं हैं और पैसों की सख्त आवश्यकता है।" ठग ने एक बारकोड डालकर तनख्वाह आने पर पैसे लौटाने का झांसा दिया। इस भावनात्मक झांसे में आकर उनके एक पुराने सहपाठी ने 16 हजार 400 रुपए ट्रांसफर भी कर दिए। मां के साथ होते-होते बचा फ्रॉड, बच्चों को किया अलर्ट एसीजेएम अनुभव तिवाड़ी ने अपनी शिक्षिका मां के साथ हुई एक साइबर ठगी के प्रयास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सुबह स्कूल जाते समय उनकी मां के पास फोन आया, जिसमें ठग ने कहा कि उनके बैंक कार्ड की वैधता खत्म हो रही है और कार्ड के नंबर मांगे। उनकी मां नंबर बता ही रही थीं कि तिवाड़ी को इसका पता चल गया और उन्होंने अपनी मां को बीच में ही रोककर फ्रॉड होने से बचा लिया। उन्होंने स्टूडेंट्स से अपील की है कि वे सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करें और यदि घर में किसी परिजन से इस तरह कोई जानकारी मांगता है, तो उन्हें तुरंत जागरूक कर ऐसा करने से रोकें। बालिकाओं की सुरक्षा के लिए 'कोर्ट वाली दीदी' शिकायत पेटी इस अभियान की सबसे अहम और संवेदनशील पहल स्कूलों में 'कोर्ट वाली दीदी' शिकायत पेटियों की स्थापना है। यह पहल खासतौर पर बालिकाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इन पेटियों में कोई भी छात्रा या छात्र अपनी किसी भी कानूनी समस्या, दुर्व्यवहार या उत्पीड़न की शिकायत को बिना किसी डर के लिखकर डाल सकेंगे। इन शिकायतों को सीधे न्यायिक अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे बच्चों को न्यायपालिका तक अपनी बात पहुंचाने का एक सुरक्षित और सीधा मंच मिलेगा। हर महीने बदलेंगे विषय, अप्रैल में फोकस साइबर सुरक्षा पर यह युवा सशक्तिकरण कार्यक्रम केवल एक दिन का अभियान नहीं है। पहले सत्र यानी अप्रैल माह का मुख्य विषय 'साइबर सिक्योरिटी' रखा गया है, जिसमें ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे हथकंडों से बचने की जानकारी दी जा रही है। वहीं, आगामी महीनों में बाल अधिकार, महिला सुरक्षा और पॉक्सो कानून जैसे महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।