जोधपुर की ‘लेडी डॉन’ सुमिता विश्नोई उर्फ सुमता ने मध्यप्रदेश के हेड कॉन्स्टेबल के साथ मिलकर एक मिठाई कारोबारी से 2 करोड़ 45 लाख रुपए की ठगी कर ली। आरोपियों ने पीड़ित को सांवरिया सेठ मंदिर में लड्डू प्रसाद का ठेका दिलाने और परिचित की जमानत कराने का झांसा दिया था। आरोप है कि कारोबारी को भरोसे में लेने के लिए नेताओं, हाईकोर्ट के जजों और वरिष्ठ अधिकारियों से पहचान होने का दावा किया गया। यहां तक कि फोन पर फर्जी बातचीत कर प्रभावशाली पहुंच का नाटक भी किया गया। जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे तो सुमता ने धमकी दी कि 'मेरा नाम गूगल करके देख लो, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अब पैसा मांगा तो जान ले लूंगी'। निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) निवासी पीड़ित पर्वत सिंह राजपुरोहित (39) ने 21 जून को बोरनाडा थाने में मामला दर्ज करवाया। नेताओं को फोन करने का दिखावा किया पर्वत सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि मेरा निम्बाहेड़ा में मिठाई का कारोबार है। करीब 27 साल से वहीं रह रहे हैं। कुछ साल पहले मेरी पहचान मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल राघव सिंह राजपूत से हुई थी। वह मेरे रेस्टोरेंट में आता-जाता रहता था। धीरे-धीरे जान-पहचान दोस्ती में बदल गई। दोस्ती बढ़ने के बाद उसने निवेश और प्रॉपर्टी में फायदा दिलाने का भरोसा देकर फरवरी 2025 में मुझे जोधपुर लाकर सुमता विश्नोई से मिलवाया था। शिकायत के अनुसार, राघव सिंह ने पर्वत सिंह से कहा था कि वह उसे ऐसी महिला से मिलवाएगा, जिसकी बड़े-बड़े अधिकारियों, नेताओं और हाईकोर्ट के जजों से अच्छी जान-पहचान है। वह आपके काम चुटकियों में करवा सकती है। इसके बाद राघव सिंह, पर्वत सिंह को जोधपुर लेकर आया था। यहां पार्श्वनाथ कॉलोनी पाल बाइपास पर सुमता से मिलवाया था। झांसे में लेने के लिए सुमता ने नेताओं को फोन करने का नाटक किया। ऐसे दिखावा किया कि उसने अलग-अलग नेताओं से बड़े अधिकार से बात की है। बाद में पता चला कि उसका एक ग्रुप है, जिसके नंबर उसने मंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों के नाम से सेव करके रखे हैं, जिससे लोगों को गुमराह किया जा सके। सांवरिया सेठ मंदिर में प्रसाद का ठेका दिलवाने का दिया भरोसा रिपोर्ट में पर्वत सिंह ने बताया कि राघव सिंह ने मुझसे कहा था कि प्रशासन में तबादले होने हैं। हमारे परिचित एक अधिकारी को चित्तौड़गढ़ का पुलिस अधीक्षक (SP) और सांवरिया सेठ मंदिर का अध्यक्ष बनाया जाना है। यदि आप उनकी ट्रांसफर-पोस्टिंग और मंदिर अध्यक्ष बनवाने में आर्थिक मदद करेंगे तो उन्हें मनचाही पोस्टिंग मिल जाएगी। इसके बाद वे अधिकारी आपके क्षेत्र में आएंगे। साथ ही, सांवरिया सेठ मंदिर का अध्यक्ष अपना परिचित बनने से मंदिर में लड्डू प्रसादी सहित अन्य कार्य आपको मिल सकते हैं। इससे आपके व्यवसाय को फायदा होगा। इतना ही नहीं, आप जो राशि निवेश करेंगे, वह भी आपको अधिक लाभ के साथ वापस मिल जाएगी। इसके बाद राघव सिंह ने मेरी मुलाकात सुमता विश्नोई से करवाई। मुलाकात के बाद सुमता ने कहा कि उसकी एसपी से लेकर IAS तक जान-पहचान है। इसके बाद सुमता ने इन्वेस्ट के नाम पर मुझसे एक करोड़ 5 लाख रुपए नकद लिए। ये पैसे सुमता के दो बेटों मनीष और विनोद विश्नोई को दिए गए। जमानत के नाम पर 1 करोड़ 40 लाख ठगे फिर बाद में राघव सिंह मेरे पास ईश्वर पाटीदार निवासी दलोदा, हेमंत पाटीदार और मनासा थाने के हेड कॉन्स्टेबल प्रकाश सीनम के साथ मेरी दुकान पर आए। उन्होंने मुझसे कहा कि ईश्वर के रिश्तेदार अर्जुन का 65 किलो अफीम मामले में निम्बाहेड़ा में नाम आया है, जिसकी हाईकोर्ट से जमानत करवानी है। इस पर मैंने उनके सामने ही सुमता से बात की। सुमता ने कहा कि "डेढ़ करोड़ रुपए लगेंगे, मैं हाईकोर्ट से जमानत करवा दूंगी।" इसके बाद ईश्वर, हेमंत और विशाल पाटीदार ने मुझे 1 करोड़ 40 लाख रुपए नकद दिए। जो मैंने अप्रैल 2025 के अंतिम सप्ताह में सुमता से वॉट्सएप पर बातचीत के बाद जोधपुर में उसके बेटों मनीष और विनोद को सौंप दिए। ईश्वर पाटीदार ने जमानत के एवज में दी गई 1 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि की गारंटी के तौर पर मुझसे पांच खाली चेक ले लिए थे। जब जमानत नहीं हुई तो ईश्वर पाटीदार ने उन्हीं पांच चेक में से 50 लाख, 60 लाख और 70 लाख रुपए के तीन चेक भरकर बैंक में लगा दिए। तीनों चेक बैंक से रिटर्न हो गए, जिसके नोटिस मुझे मिले। पैसे लौटाने का दिया आश्वासन इसके बाद मैंने सुमता से इस बारे में बात की। उसने आश्वासन देते हुए कहा कि "हाईकोर्ट जज को पेमेंट कर दिया है, किसी कारणवश जमानत नहीं हुई। मैं तुम्हारा पैसा वापस कर दूंगी।" सुमता लगातार पैसे लौटाने का झांसा देती रही। बाद में मैंने हेड कॉन्स्टेबल राघव सिंह से भी बात की, जिसने भी सुमता से मेरे पैसे वापस दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद 28 अगस्त 2028 को मैं फिर से पैसे लेने सुमता के घर गया। सुमता ने मुझे 30 लाख रुपए का चेक दिया। जब मैं चेक लेकर निम्बाहेड़ा पहुंचा तो सुमता ने फोन कर मुझे वापस बुलाया और कहा- "चेक लेकर आओ, तुम नकद रुपए ले लो।" इसके बाद उसने चेक वापस ले लिया और मुझे 30 लाख रुपए नकद दे दिए। साथ ही बाकी रकम भी लौटाने का आश्वासन दिया। ये 30 लाख रुपए मैंने ईश्वर, हेमंत और विशाल को लौटा दिए। बकाया भुगतान के लिए मैंने सुमता से कई बार मिन्नतें कीं, लेकिन उसने शेष रकम नहीं लौटाई। इसके बाद ईश्वर, हेमंत और विशाल मेरी दुकान पर आकर मुझ पर भुगतान का दबाव बनाने लगे। इस पर मैं उन सभी को साथ लेकर 3 अक्टूबर 2025 को जोधपुर स्थित सुमता के घर पहुंचा। पहले से धोखाधड़ी के मुकदमे वाला प्लॉट नाम कराया वहां सुमता ने हमसे कहा कि "पार्श्वनाथ सिटी का सी-45 प्लॉट मेरा है, जिसे मैं तुम्हारे नाम कर दूंगी।" 1 करोड़ 40 लाख रुपए के एवज में उसने उस प्लॉट की कीमत 80 लाख रुपए बताई और ईश्वर के कहने पर विशाल पाटीदार के नाम उसका मुख्तारनामा कर दिया। साथ ही बाकी पैसे नकद लौटाने का भी आश्वासन दिया। बाद में जब विशाल ने उस प्लॉट को बेचने के लिए लोगों से संपर्क किया तो पता चला कि उस प्लॉट के संबंध में बोरानाड़ा थाने में सुमता के खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। पैसे लौटाने से किया इनकार, धमकी दी जब मैंने इसकी जानकारी जुटाई और सुमता से इस बारे में बात की तो उसने मुझे जान से मारने की धमकी देते हुए कहा- "अब पैसा मांगा तो जान ले लूंगी, मेरा नाम सुमता डॉन है।" सुमता कई बार हमारे सामने ही बोरानाडा SHO शकील अहमद से बात करती थी। इसलिए हमें यकीन था कि पुलिस भी हमारा साथ नहीं देगी। ऐसे में हम लोग पुलिस कमिश्नर के पास गए और उन्हें आवेदन दिया। कमिश्नर शरत कविराज ने हमें आश्वस्त किया कि आपकी पूरी मदद करेंगे। कमिश्नर के आश्वासन के बाद हमने थाने में मुकदमा दर्ज करवाया। कमिश्नर की हस्तक्षेप पर ही मुकदमा दर्ज हुआ। सुमता सहित चार आरोपियों पर मामला दर्ज एडीसीपी नरेंद्र सिंह देवड़ा ने बताया- सुमता विश्नोई के खिलाफ पीड़ित पर्वत सिंह ने रिपोर्ट दी है। आरोप है कि सुमता ने नेताओं से लेकर अधिकारियों से जान-पहचान का झांसा दिया। उससे करीब 2 करोड़ 45 लाख रुपए हड़प लिए। पुलिस ने सुमता, उसके दो बेटों और मध्यप्रदेश पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल समेत चार लोगों के खिलाफ 2 करोड़ 45 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुटी हुई है।