जोधपुर महानगर अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-4 की कोर्ट ने 10 साल पहले हुए एक आठ साल के बच्चे के बहुचर्चित अपहरण और फिरौती के मामले में शनिवार को फैसला सुनाया। इसमें सभी 5 बदमाशों जितेंद्रसिंह, नटवरसिंह, रिड़मलसिंह, लोकेश सारण व राजूसिंह उर्फ राजेंद्रसिंह को किडनैप और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी माना गया। पीठासीन अधिकारी तरुण कुमार कुमावत ने इन अपराधियों को आजीवन कठोर कारावास और 15-15 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस घटना में बदमाशों ने दिनदहाड़े बच्चे का अपहरण कर उसके परिवार से डेढ़ करोड़ रुपए की फिरौती की मांग की थी। घटना 12 मार्च 2016 की है। जब जोधपुर के बनाड़ इलाके के एक प्रॉपर्टी कारोबारी का 8 साल का बेटा सुबह करीब 6:30 से 7 बजे के बीच घर के बाहर गली में खेल रहा था। उसी दौरान एक सफेद रंग की कार में सवार होकर आए बदमाशों ने बच्चे को जबरदस्ती उठाकर कार में डाल लिया और भाग गए। इस घटना की चश्मदीद बच्चे की 12 साल की बहन थी, जिसने तुरंत अपनी मां को पूरी घटना की जानकारी दी। तब घटना के संबंध में बनाड़ थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई। दूसरी बार कॉल कर मांगी डेढ़ करोड़ की फिरौती पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, बच्चे के अपहरण के कुछ ही घंटों बाद प्रोपर्टी डीलर के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने पहले किसी 'प्रधान' के बारे में पूछताछ की और फोन काट दिया। इसके बाद सुबह लगभग 10:30 से 11 बजे के बीच किडनैपर्स ने उसी नंबर पर दोबारा कॉल किया। इस बार उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि बच्चा उनके कब्जे में है और उसकी सुरक्षित रिहाई के एवज में डेढ़ करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। साथ ही, पुलिस को सूचना देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। बच्चे ने खुद दी जानकारी, पांच गिरफ्तार इस बीच, 15 मार्च 2016 को अपहृत बच्चा बावड़ी स्थित एक होटल के पास सुरक्षित मिल गया। इस दौरान बच्चे ने खुद एक फोन के माध्यम से अपनी मां से संपर्क कर अपने सुरक्षित होने की जानकारी दी थी। मामले के जांच अधिकारी व तत्कालीन उप निरीक्षक कमलदान चारण ने अपनी जांच में अप्रत्यक्ष सबूतों की कड़ियां जोड़ते हुए पांचों आरोपी, पीपाड़ रोड निवासी जितेंद्रसिंह पुत्र कल्याणसिंह, खारिया मिठापुर निवासी नटवरसिंह पुत्र स्व. हिम्मतसिंह, ओसियां के धुंधाड़ा निवासी रिड़मलसिंह पुत्र स्व. जालमसिंह, पीपाड़ के कागल निवासी लोकेश सारण पुत्र रामदयाल सिंह और राजूसिंह उर्फ राजेंद्रसिंह को गिरफ्तार किया और जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की। अभियोजन: मासूम के किडनैपर्स की हरकत से समाज में भय सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक दशरथसिंह राजपुरोहित ने न्यायालय के समक्ष मजबूती से अभियोजन का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि अभियुक्तों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत एक मासूम बच्चे का अपहरण किया है। उन्होंने तर्क दिया कि केवल फिरौती वसूलने के उद्देश्य से किए गए इस कृत्य से समाज में भारी भय का माहौल पैदा हुआ है। बचाव पक्ष के तर्क: पुलिस की जांच और साक्ष्यों पर उठाए सवाल दूसरी ओर, अभियुक्तों के बचाव में उतरे वकीलों ने अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी को संदेह के घेरे में खड़ा किया। बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क देते हुए कहा कि पुलिस ने इस मामले में उनके क्लाइंट्स को पूरी तरह से झूठा फंसाया है। उन्होंने दलील दी कि मामले की शुरूआती FIR में न तो किसी आरोपी का नाम दर्ज था और न ही उनकी कोई स्पष्ट पहचान बताई गई था। इसके साथ ही, बचाव पक्ष ने सबूतों की बरामदगी में स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए अदालत से सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर बरी करने की मांग की। कोर्ट: 124 पेज के ऑर्डर में बारीकी से विश्लेषण दोनों पक्षों के वकीलों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध सामग्री का गहन अध्ययन करने के बाद अपर सेशन न्यायाधीश तरुण कुमार कुमावत ने बचाव पक्ष की सभी दलीलों को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने विस्तृत 124 पेज के फैसले में स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी कमलदान चारण द्वारा प्रस्तुत किए गए 84 दस्तावेजी साक्ष्य और 32 गवाहों के मौखिक बयान अभियुक्तों के खिलाफ जुर्म साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह से जुड़ रही है और यह अभियुक्तों के अपराध को संदेह से परे सिद्ध करती है। कोर्ट ने सभी 5 अभियुक्तगण को अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।