भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत कनिष्ठ तकनीकी सहायकों के मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से प्रदेशभर में 17 अप्रैल से जेटीए अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर हैं। अब संगठन ने 1 मई को सामूहिक इस्तीफा देने की चेतावनी दी है। इसे लेकर जिला प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि विभाग से जेटीए और जेईएन के बीच कार्यों के बंटवारे में दोहरी नीति अपनाई जा रही है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। संघ का कहना है कि 3 अप्रैल के आदेश में जेटीए से पंचायतीराज योजनाओं का कार्यभार हटा दिया गया, जबकि पहले वे सभी योजनाओं का कार्य कर रहे थे। वहीं नए एसओपी के नाम पर कार्य विभाजन को स्थगित कर दिया गया, लेकिन पुराने आदेशों को जारी रखा गया। इससे स्थिति और उलझ गई है। जेटीए की प्रमुख मांगों में कार्यों का समान बंटवारा, संयुक्त हस्ताक्षर की अनुमति, एसओपी को स्पष्ट करना और वरिष्ठ तकनीकी सहायक के पद पर पदोन्नति शामिल है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायतीराज विभाग के अभियंता ग्रामीण विकास की योजनाओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं। जबकि जेटीए को उनके कार्यों से बाहर किया जा रहा है। ज्ञापन सौंपने के बाद 23 अप्रैल से जिला परिषद मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन जारी है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 1 मई को प्रदेश भर के जेटीए सामूहिक इस्तीफा देंगे। अध्यक्ष मोहम्मद हाशिम, उपाध्यक्ष देवशंकर रोत, महामंत्री निकेश पंड्या, रामचंद्र सुथार, हेमेंद्र वानावत, लालशंकर, दीपेन परिदार, गौरव पाटीदार, प्रकाश आदि उपस्थित रहे।