भास्कर इनसाइट मेडिकल कॉलेज पार्क-97 में बुधवार को 2024 बैच के सीनियर्स अपने जूनियर 2025 बैच के स्टूडेंट्स को लाइन में खड़ा कर पूछताछ कर रहे थे। ये देख एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य (भास्कर रिपोर्टर) वहां पहुंचे और सीनियर्स से कारण पूछा। सीनियर्स का कहना था कि कार्यक्रम में भागीदारी की एंट्री कर रहे हैं, अनुमति हमारे पास है। सीनियर्स से लिखित परमिशन मांगने पर एक पत्र दिखाया। यह अंबेडकर जयंती पर लेक्चर थिएटर-5 में कार्यक्रम की अनुमति के लिए आवेदन था। इसमें पार्क या किसी बाहरी गतिविधि का कोई जिक्र नहीं था। इस पर उन्हें प्रिंसिपल ऑफिस ले गए, लेकिन वे मौजूद नहीं थे। एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. फतेहसिंह भाटी से अनुमति के बारे में पूछा। उनसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इस पर सदस्य ने घटना की फोटो और संबंधित पत्र एंटी रैगिंग कमेटी के सोशल मीडिया ग्रुप में शेयर किए। इसके बावजूद देर शाम तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कॉलेज प्रशासन ने रैगिंग से इनकार करते हुए कहा कि एक ही समुदाय के बच्चे थे। शेष | पेज 13 सीनियर्स की क्लास, पार्क में जूनियर्स की परेड जैसा दृश्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए जानकारी क्लासरूम में क्यों नहीं ली? पत्र में जूनियर्स को पार्क में बुलाने, पूछताछ की आज्ञा नहीं थी, फिर ऐसा क्यों किया ? रैगिंग की शिकायतें नवंबर-24 : जूनियर गर्ल्स के हॉस्टल में जाने की शिकायत जूनियर को आशंकित करना, शर्म महसूस कराना भी रैगिंग एनएमसी के अनुसार रैगिंग में ऐसा आचरण, बोलने-लिखने का प्रभाव जो स्टूडेंट को परेशान, अभद्रता या अपमानित करता है। ऐसी गतिविधियां जो जूनियर को झुंझलाहट, कठिनाई या मनोवैज्ञानिक हानि, भय, आशंका दे। ऐसा कार्य करने के लिए कहना जिससे उसे शर्म हो। शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। डॉ. बीएस जोधा, प्रिंसिपल, एसएन मेडिकल कॉलेज अगस्त-25 : पीजी रेजिडेंट के मृत्यु से पूर्व बयान पर केस एंटी रैगिंग कमेटी में गया था। जनवरी-26 : पैरामेडिकल कॉलेज छात्र ने पूरी कक्षा की ओर से रैंगि​ग की शिकायत की। उनमें आपस में चर्चा चल रही थी: डॉ. जोधा क्या कॉलेज में रैगिंग जैसी घटना हुई थी ? {डॉ. जोधा : नहीं। सोशल मीडिया पर डिटेल शेयर हुई है? {ऐसे ही डाला होगा। दोनों बैच के बच्चों ने बताया कि अंबेडकर जयंती की तैयारियां कर रहे हैं। एक ही कम्युनिटी के थे इसलिए चर्चा चल रही थी। लाइन में क्यों खड़ा किया हुआ था? {हमारे डॉक्टर्स में कई आदर होते हैं। इसके तहत सभी आपस में खड़े होकर बात कर रहे थे। सीधी बात मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल का तर्क- ये तो हम लोगों में आदर देने का तरीका है