प्रदेश में खराब जीवनशैली, गलत खान-पान और बढ़ता मोटापा लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। वर्तमान समय में शराब से कम, बल्कि पिज्जा-बर्गर जैसे जंक फूड के अधिक सेवन के कारण नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) तेजी से बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार ने 41 जिलों के 61 जिला अस्पतालों में संचालित मिशन लिवर स्माइल क्लिनिक के बाद अब संभाग स्तर पर फाइब्रो स्कैन मशीनें स्थापित कर दी हैं। जेएलएन अस्पताल अजमेर, आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा और भरतपुर संभाग स्तर पर अप्रैल माह से फैटी लिवर की स्क्रीनिंग सुविधा शुरू हो जाएगी। एसएमएस में पहले से फाइब्रो स्कैन मशीन उपलब्ध है, जबकि सांगानेर स्थित अस्पताल में स्माइल क्लिनिक संचालित है। उल्लेखनीय है कि इस बीमारी की प्रिवलेंस रेट 9 से 32 प्रतिशत तक है। क्या है फाइब्रो स्कैन मशीन फाइब्रो स्कैन एक आधुनिक मशीन है, जिसके माध्यम से बिना चीर-फाड़ के लिवर की जांच की जाती है। यह मशीन लिवर की कठोरता और उसमें जमा वसा (फैट) की मात्रा को मापती है। यदि लिवर में अधिक फैट या कोई अन्य समस्या होती है, तो यह मशीन उसे शुरुआती स्तर पर ही पहचान लेती है। मिशन लिवर स्माइल क्लिनिक शुभारंभ: 4 अप्रैल 2025; यह देश का पहला राज्य है, जहां इस प्रकार के क्लिनिक संचालित किए जा रहे हैं। 41 जिलों के 61 जिला अस्पतालों में मंगलवार-शुक्रवार को क्लिनिक संचालित होते हैं। कम्युनिटी स्तर पर 2.9 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें 27.8 लाख संदिग्ध पॉजिटिव मिले हैं। इनमें 14.2 लाख पुरुष और 13.6 लाख महिलाएं शामिल हैं। जिला अस्पतालों में FIB-4 स्कोर के माध्यम से 37,156 लोगों की जांच में 1004 कन्फर्म पॉजिटिव मरीज मिले हैं, जिनका उपचार जारी है। “लिवर से संबंधित बीमारियां अब उन लोगों में भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो शराब का सेवन नहीं करते। शोध के अनुसार, देश में 30 से 40 प्रतिशत लोग नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज से प्रभावित हैं। गलत खान-पान और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं। एक सामान्य व्यक्ति के लिवर में 5 प्रतिशत तक वसा सामान्य मानी जाती है, लेकिन यदि यह 10 प्रतिशत से अधिक हो जाए, तो इसे स्टीटोसिस की श्रेणी में रखा जाता है।” -विशेषज्ञ- गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. एस.एस. शर्मा, सुधीर महर्षि और फिजिशियन डॉ. पुनीत सक्सेना के अनुसार