भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे त्योहार हर साल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों से आगे-पीछे क्यों होते रहते हैं? इस साल विक्रम संवत 2083 हमें इसी पहेली का उत्तर देने जा रहा है। 17 मई से शुरू हो रहा ज्येष्ठ अधिक मास केवल एक धार्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह खगोल विज्ञान और अध्यात्म का वह मिलन बिंदु है, जहां समय खुद को करेक्ट करता है। इस समय शादियों का सीजन चल रहा है, लेकिन अगले महीने से यह रौनक कुछ दिनों के लिए कम हो जाएगी। इस बार अधिक मास 15 जून तक चलेंगे। इस अवधि में मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। वहीं अधिक मास होने से राखी, नवरात्र व दीपावली आदि पर्व करीब 20 दिन आगे बढ़ जाएंगे। बता दें कि अधिक मास भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय मास है। इसी कारण इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस मास में किया गया एक जप, सौ यज्ञों के समान फल देने वाला होता है। पंडित मनोज दुबे के अनुसार धार्मिक दृष्टि से यह समय साधना, आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास ज्येष्ठ माह में लगेगा। वर्ष 2026 विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार 12 नहीं, बल्कि 13 माह का संयोग बन रहा है। हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है, जबकि सौर वर्ष की गणना भगवान सूर्य की गति से होती है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर रह जाता है। यही अंतर लगभग 32 माह 16 दिन के बाद 1 पूरे महीने के बराबर हो जाता है। तब पंचांग संतुलन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। मई के पहले पखवाड़े में कई मुहूर्त हैं : अप्रैल और मई के शुरुआती पखवाड़े में शादियों के कई शुभ मुहूर्त हैं। सर्राफा और क्लॉथ मार्केट में भी इसकी रौनक है। अधिक मास लगने से ठीक पहले शादियों के कई बड़े मुहूर्त हैं। अधिक मास खत्म होने के बाद फिर से शहनाइयांे का दौर शुरू हो जाएगा। इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को रहेगी। आमतौर पर इस दिन के पहले मांगलिक कार्यक्रम होते हैं, मगर इस बार 16 जुलाई को गुरु के अस्त होने के कारण सभी मांगलिक कार्यक्रम 15 जुलाई तक ही होंगे।