नमस्कार हनुमानगढ़ में DTO साहब कला के कद्रदान निकले। सड़क पर ही महफिल जमा ली। टोंक में मंत्रीजी ने खेत में पहले तो पटवारी की रेल बनाई और फिर लगे हाथ रील बना ली। चित्तौड़गढ़ में कार्यभार संभालते ही कलेक्टर मैडम हॉस्पिटल का औचक दौरा करने निकल गईं और झुंझुनूं में मर्डर के आरोपी ने रो-रोकर मोहल्ला सिर पर उठा लिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. कला के कद्रदान निकले DTO साहब जो काम तलवार से नहीं हो सकते, वो कभी-कभी बांसुरी से हो जाते हैं। कला की अपनी ताकत है। कला का महत्व तभी है जब कद्रदान को कला की समझ हो। बात हनुमानगढ़ के नोहर की है। यहां DTO राय सिंह चर्चा में रहते हैं। काला चश्मा-घनी मूछें। ऊपर से खाकी वर्दी उनके 'लुक' लोक-लुभावन बनाती है। रौबीली कद-काठी और पुलिस की नौकरी के बावजूद साहब कला के कद्रदान हैं। साहब ड्यूटी पर थे। मौसम सुहाना था। काले चश्मे में घटाएं और भी काली लग रही थीं। इस दौरान साहब की नाकाबंदी पर एक बाइक रोकी गई। बाइक पर तीन लोग सवार। हेलमेट का अता-पता नहीं। साहब चालक के पास पहुंचे और तफ्तीश करने लगे। तफ्तीश में संदूक जैसा बैग खुलवाया तो हारमोनियम निकला और चालक निकला गायक। साहब की बांछें खिल गईं। सड़क पर ही महफिल जमी। साहब की फरमाइश पर चालक ने बाइक की सीट पर हारमोनियम रख गाना शुरू किया- 'हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह…' साहब की खुशी का ठिकाना नहीं। क्या लयकारी, क्या मुर्कियां, क्या बंदिश। डीटीओ साहब गायकी पर निसार हो गए। चालान माफ किया सो किया हेलमेट भी गिफ्ट कर दिया। 2. मंत्रीजी ने पटवारी को लगाई फटकार मंत्रीजी टोंक के मालपुरा से आते हैं। यहीं की जनता ने जिताकर विधानसभा पहुंचाया। बारिश-ओलों ने फसलें तबाह कर दी। मंत्रीजी दौरे पर निकले। एक खेत में पहुंच गए। साथ में पीड़ित किसान, अधिकारी, पटवारी। सबके के सब साथ चलने लगे। खेतों की हालत खराब। सिस्टम की उससे भी ज्यादा खराब। पटवारी ने पहले ही रिपोर्ट बनाकर सब्मिट कर दी। कई किसान छूट गए। मंत्रीजी के कानों तक किसानों ने यह बात पहुंचा दी। पटवारी मौजूद था ही। जनता देख रही थी। मंत्रीजी ने खलिहान में ही पटवारी पर बरस पड़े। बोले- तुझे कहां की जल्दी लग रही थी? तू बीमा कंपनी का गुलाम है क्या? अब मुझे समझा कि क्रॉप कटिंग के आधार पर इंश्योरेंस कैसे मिलेगा? पटवारी सिर झुकाकर पंजे से धरती कुचरता रहा। कुछ बोला नहीं। समझदारी दिखाई। वरना गाज गिर सकती थी। खैर, परशुराम से मंत्रीजी वशिष्ट अवतार में आए और पीड़ित किसानों को आशीर्वाद सा दिया- चिंता की कोई बात नहीं। सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। नुकसान की भरपाई होगी। इस पूरे घटनाक्रम का कुछ युवक वीडियो बना रहे थे। उन्होंने मंत्रीजी की जोरदार रील बनाई और बैकग्राउंड में KGF का गाना भी लगाया- 'शोला बुझाने को बारिश होकर मैं बरसूंगा वादा है.. 3. चार्ज संभालते ही एक्शन में कलेक्टर मैडम चित्तौड़गढ़ में कलेक्टर मैडम कार से उतरीं और दफ्तर पहुंचाकर कार्य भार संभाल लिया। काम संभालने के बाद फुरसत भी नहीं ली और दौरे पर निकल गईं। पहला नंबर जिला हॉस्पिटल का आया। कलेक्टर साहिबा ने रस्म अदायगी नहीं की। एक-एक वार्ड में गईं। मरीजों से बात की। ईसीजी, कचरा, रसोईघर की मोटू-पतलू वाली पेंटिंग तक पर बात कर ली। व्यवस्थाएं ठीक-ठाक मिलती गईं और अधिकारियों को राहत की सांस आती रही। हॉस्पिटल का एक हिस्सा ऐसा था जिसमें कबाड़ भरा था। यहां कलेक्टर पहुंची तों अधिकारियों की सिट्टी-पिट्टी गुम होने लगी। मैडम ने कबाड़ को लेकर सवाल किया गया तो पीएमओ साहब बोले-फाइल भेजी हुई है। दूसरा सवाल आया- फाइल कब भेजी थी। पीएमओ साहब के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। बोले- कोविड के समय भेजी थी। बस इतना सुनते ही मैडम भड़क गईं। बोली- डॉक्टर साहब और बहुत सारी चीजों में इधर-उधर का जवाब दे रहे हैं। ये गलत बात है। 4. चलते-चलते.. बात झुंझुनूं की है। एक बदमाश को अपनी शान में गुस्ताखी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं। बड़ा बदमाश बनने के लिए जरूरी भी है कि गुस्ताखियां बर्दाश्त न की जाएं। एक युवक ने उसकी रील पर कमेंट कर दिया था। यह गुस्ताखी थी और बड़ा बनने का अवसर था। बदमाश ने साथियों के साथ मिलकर युवक पर फायरिंग कर दी। युवक जान से चला गया। यूं तो बदमाश को चाहिए था कि वह इस घटना को उपलब्धि के तौर पर ले। लेकिन वह पहाड़ियों में जाकर छुप गया। पुलिस ने ढूंढ निकाला और पकड़कर ले आई। वह पुलिस के कंधों पर लटका नजर आया। दोनों टांगे सीधी होने में दिक्कत कर रही थीं। इसके बावजूद उसे हिम्मत रखनी चाहिए थी। बड़ा बदमाश बनने के लिए बड़ा दर्द सहने की क्षमता भी होनी चाहिए। लेकिन वह तो बच्चों की तरह फूट-फूट कर रो रहा था। एक लयकारी सी सुनाई दे रही थी जिसका तात्पर्य था-अब बदमाशी नहीं करूंगा। अब उसके रोने की रीलें बन रही हैं। इनपुट सहयोग- दीपक भारद्वाज (हनुमानगढ़), महावीर बैरवा (टोंक), ऋतुपर्णा मुखर्जी (चित्तौड़गढ़), इम्तियाज भाटी (झुंझुनूं)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी.