करौली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उड़ान योजना के तहत सेनेटरी नेपकिन वितरण प्रणाली को सरल बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान ऑनलाइन और ओटीपी आधारित व्यवस्था जटिल है, जिससे लाभार्थियों तक योजना का पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा और बढ़ते कार्यभार के कारण वे मानसिक दबाव में हैं। कार्यकर्ताओं के अनुसार पहले सेनेटरी नेपकिन का वितरण ऑफलाइन होता था, लेकिन अब इसे जनआधार पंजीकरण और ओटीपी आधारित प्रणाली से जोड़ा गया है। प्रत्येक केंद्र पर 200 से 500 तक लाभार्थी होने के कारण ओटीपी प्रक्रिया को संभालना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि यह व्यवस्था जारी रही तो कई लाभार्थी योजना से वंचित रह सकते हैं। कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री वंदन योजना, पोषण ट्रैकिंग, ई-केवाईसी फेस कैप्चर, बच्चों की ऑनलाइन उपस्थिति, नाश्ता और गर्म भोजन की रिपोर्टिंग व प्रतिदिन गृह भ्रमण जैसे कई कार्य करने पड़ते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें समय-समय पर अन्य गतिविधियों में भी लगाया जाता है, जिससे उनका कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है और विभागीय मूल कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सेनेटरी नेपकिन वितरण को पुनः ऑफलाइन किया जाए, ताकि प्रक्रिया सरल हो सके और अधिक महिलाओं को लाभ मिल सके। साथ ही, अतिरिक्त कार्यभार को देखते हुए कार्यकर्ताओं को कम से कम एक हजार रुपए मासिक प्रोत्साहन राशि देने की भी मांग की गई है। कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि यह कार्य महिला अधिकारिता विभाग से जुड़ा होने के कारण इसे ग्राम साथिन और संबंधित विभाग की महिला पर्यवेक्षकों के माध्यम से कराया जाए। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर कार्यभार कम हो सकेगा। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार के समक्ष समस्या खड़ी करना नहीं है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उड़ान योजना सहित गैर-आईसीडीएस कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने संगठन को विश्वास में लेकर जल्द नीतिगत निर्णय लेने की अपील की है।