करौली में कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने पंचायतों और नगरीय निकायों के लंबे समय से लंबित चुनावों को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस कार्यालय में एक बैठक कर रणनीति बनाई गई, जिसमें स्थानीय स्वशासन के चुनाव जल्द कराने की मांग उठाई गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बताया कि राज्य में पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासकों की नियुक्ति के कारण जनता के मताधिकार का हनन हो रहा है और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही कमजोर पड़ रही है। 'तय समयसीमा में चुनाव नहीं कराना कोर्ट के आदेशों की अवहेलना' ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 243E, 243U और 243K का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। कांग्रेस ने यह भी उल्लेख किया कि न्यायालयों के निर्देशों के बावजूद तय समयसीमा में चुनाव नहीं कराना आदेशों की अवहेलना है। कांग्रेस पदाधिकारियों ने राज्यपाल से मांग की कि पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव शीघ्र कराए जाएं। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र रूप से कार्य करने के निर्देश देने और प्रशासकों के स्थान पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बहाल करने की भी अपील की। इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे। इनमें कांग्रेस जिला अध्यक्ष और टोडाभीम विधायक घनश्याम महर, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के जिला अध्यक्ष दीपेंद्र राजावत, पूर्व जिला अध्यक्ष अलका मीना, हुकम बाई मीणा, महिला संगठन की जिला अध्यक्ष शरदो गुर्जर और पीसीसी सचिव भूपेंद्र भारद्वाज प्रमुख रूप से शामिल थे।