खैरथल में 'तंबाकू मुक्त राजस्थान अभियान' के तहत जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए एक आमुखीकरण कार्यशाला हुई। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस कार्यशाला का आयोजन जिला प्रशासन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा एसआरकेपीएस राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में तंबाकू नियंत्रण कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और विभिन्न विभागों के समन्वय से तंबाकू मुक्त एवं स्वस्थ वातावरण तैयार करना था। कार्यशाला को संबोधित करते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर शिवपाल जाट ने तंबाकू सेवन को एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इससे कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारियों सहित कई घातक रोगों का खतरा बढ़ता है। कलेक्टर ने सभी विभागों से जिले को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने और प्रभावी कार्रवाई करने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को तंबाकू की लत से बचाने के लिए कानूनों का सख्ती से पालन और व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। एसआरकेपीएस राजस्थान के कार्यकारी निदेशक राजन चौधरी ने तंबाकू नियंत्रण की राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जिले में एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। चौधरी ने तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान, तंबाकू मुक्त ग्राम पंचायत, तंबाकू मुक्त पीढ़ी अभियान और तंबाकू विक्रेताओं के लिए लाइसेंस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों की भागीदारी के बिना 'तंबाकू मुक्त राजस्थान' का लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं है। कार्यशाला में एसआरकेपीएस के राज्य समन्वयक हीरेन्द्र सेवदा ने सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा), 2003 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है और ऐसे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य है। अधिनियम के तहत तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापनों पर रोक है। साथ ही, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है और शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री पर भी रोक है। सभी तंबाकू उत्पादों पर स्वास्थ्य चेतावनी अंकित करना भी कानूनन अनिवार्य है। कार्यशाला में अधिकारियों को तंबाकू नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान, प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका, निरीक्षण प्रक्रिया, चालान कार्रवाई, जनजागरूकता कार्यक्रमों और विभागीय जिम्मेदारियों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों से अपने-अपने विभागों में नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और नियमित मॉनिटरिंग करने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चंद मेघ, डीएसपी लालसिंह यादव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारी रमेश चंद देहमीवाल, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मजदूर विकास फाउंडेशन के संस्थापक ताराचंद खोयड़ावाल और समन्वयक प्रदीप कुमार ने भी तंबाकू मुक्त समाज निर्माण के लिए सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया।