भरतपुर| खरमास समाप्त होते ही मंदिरों में फिर से शुभ कार्यों की शुरुआत हो गई है। जहां एक तरफ लग्न शुरू हो रहे हैं तो वहीं, मंदिरों में भगवान के भोग और श्रृंगार में भी बदलाव देखने को मिलेगा। अब बढ़ती गर्मी को देखते हुए भगवान को ठंडक देने वाले भोग चढ़ाए जाएंगे। मंदिरों में बुधवार से तरबूज, खीरा, ककड़ी, लस्सी और ठंडे पेय पदार्थों का भोग लगना शुरू हो गया है। पुजारियों के अनुसार गर्मी के मौसम में भगवान को शीतलता देने के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है, जिससे भक्तों में भी आस्था और उत्साह बढ़ता है। पुजारी वैदिक प्रेमी शर्मा बताते हैं कि ठीक एक महीने बाद 14 अप्रैल को खरमास खत्म होते भगवान के वस्त्रों में भी परिवर्तन किया गया है। अब भारी और ऊनी वस्त्रों की जगह हल्के ‘सूती (सूत्री) वस्त्र’ पहनाए जा रहे हैं। कई मंदिरों में भगवान के लिए पंखे, कूलर और विशेष शीतल जल की व्यवस्था भी की गई है। खिरनी घाट स्थित अग्रेश्वर महादेव मंदिर में वैशाख शुरू होते ही गुलकंद,ऋतु फल, ककड़ी, सतुआ,कतिरा का भोग लगना शुरू हो जाएगा। राधा रमण मंदिर के पुजारी वीरेंद्र शर्मा बताते हैं कि खरमास खत्म होते ही गर्मी के अनुरूप भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। खरमास समाप्त होने के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश सहित अन्य मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत हो गई है।