किशनगढ़बास कस्बे के ऐतिहासिक किले में स्थित प्राचीन बिहारीजी मंदिर से अज्ञात चोरों ने दानपात्र तोड़कर करीब 20 हजार रुपए नकद चुरा लिए। सोमवार शाम भजन-कीर्तन के दौरान चोरी का खुलासा हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पिछले रास्ते से घुसे चोर मंदिर के महंत विनोद मिश्रा ने बताया कि चोर मंदिर के पिछले रास्ते से अंदर घुसे और दानपात्र को निशाना बनाया। उन्होंने बताया कि 11 जुलाई को मंदिर परिसर में एक भंडारे का आयोजन हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया था। इसी कारण दानपात्र में अच्छी-खासी राशि जमा हो गई थी। मुड़े हुए पतरे पर पड़ी श्रद्धालु की नजर सोमवार शाम पूजा-अर्चना के बाद महंत श्रद्धालुओं के साथ भजन-कीर्तन कर रहे थे। इसी दौरान श्रद्धालु नरेश की नजर दानपात्र पर पड़ी। उन्होंने देखा कि दानपात्र का लोहे का पतरा मुड़ा हुआ था। करीब से जांच करने पर दानपात्र से करीब 20 हजार रुपए नकद गायब मिले। चोरी की जानकारी मिलते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर किशनगढ़बास थाने के सहायक उप निरीक्षक होशियार सिंह अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मौके का मुआयना किया और मंदिर से जुड़े लोगों तथा आसपास के निवासियों से पूछताछ की। महंत विनोद मिश्रा की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। महंत विनोद मिश्रा ने बताया कि किले में स्थित बिहारीजी मंदिर एक ऐतिहासिक और प्राचीन स्थल है। इसका निर्माण किले के साथ तत्कालीन महाराजा द्वारा कराया गया था। यह मंदिर कस्बे और आसपास के क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं ने की जल्द गिरफ्तारी की मांग चोरी की घटना की जानकारी मिलते ही राकेश नरूका, अनिल राठौड़, संदीप वलेचा (राजा), मदन पाटनिया, विजय बत्रा, मोहन और नरेश डिंपल सहित कई श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा की और पुलिस से जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की।