किशनगढ़बास क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे’ के तहत कानूनी साक्षरता एवं संवेदीकरण शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को साइबर दुर्व्यवहार और उससे बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खैरथल एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रनवीर सिंह ने इस्माईलपुर और किशनगढ़बास के स्कूलों में बच्चों को संबोधित करते हुए एक वास्तविक घटना का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बच्चे ने मोबाइल का गलत इस्तेमाल करते हुए अपने पिता के खाते से 50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे, जो परिवार की जरूरतों के लिए रखी गई राशि थी। साइबर दुर्व्यवहार की परिभाषा और खतरे समझाए अधिकारियों ने बताया कि साइबर दुर्व्यवहार का मतलब मोबाइल, इंटरनेट या सोशल मीडिया के जरिए किसी को अपमानित करना, धमकाना या मानसिक रूप से परेशान करना है। यह समस्या अब केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्हाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम कमेंट, ऑनलाइन गेमिंग चैट और वीडियो कॉल तक तेजी से फैल रही है। उन्होंने समझाया कि एक स्क्रीनशॉट, फोटो या एडिटेड वीडियो कुछ ही मिनटों में सैकड़ों लोगों तक पहुंच सकता है, जिससे पीड़ित को मानसिक तनाव और सामाजिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र के अन्य विद्यालयों में भी चला जागरूकता अभियान इस अभियान के तहत खानपुर मेवान में एसीजेएम नीतू रानी, माहोंद में एसीजेएम लोकेश मीणा और नूरनगर में सिविल न्यायाधीश डॉ. रिमझिम ने भी विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक किया। शिविर में छात्रों को अनजान लिंक या कॉल से सावधान रहने, ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा न करने, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत शिक्षक या अभिभावक को देने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी गई। डिजिटल सुरक्षा को लेकर दिया गया मजबूत संदेश इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में जागरूक और सुरक्षित बनाना है। ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे’ कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश दिया गया और छात्रों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया।