किशनगढ़बास क्षेत्र के स्कूलों में बुधवार को न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और कानून के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। यह पहल राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित “ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे” कार्यक्रम के तहत की गई, जिसमें छात्रों को साइबर दुर्व्यवहार से बचाव के तरीके समझाए गए। अधिकारियों ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल किशनगढ़बास, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल खैरथल और राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल बम्बोरा में जाकर विद्यार्थियों के साथ इंटरेक्टिव सत्र आयोजित किए। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीतू रानी, लोकेश मीणा और सिविल न्यायाधीश डॉ. रिमझिम ने छात्रों को साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे और उनसे बचने के उपाय समझाए। प्रमुख उद्देश्य और पहुंच राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की प्रेरणा से राज्यभर के लगभग 55 हजार स्कूलों के करीब 10 लाख विद्यार्थी इस अभियान से लाभान्वित होंगे। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल युग में साइबर दुर्व्यवहार तेजी से बढ़ रहा है। इसमें सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम कमेंट और ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से अपमान, धमकी या परेशान करना शामिल है। उन्होंने चेताया कि स्क्रीनशॉट, फोटो या एडिटेड वीडियो मिनटों में वायरल होकर किसी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विद्यार्थियों को दी गई साइबर जागरूकता कार्यक्रम में छात्रों को फर्जी आईडी बनाकर प्रतिरूपण, ग्रुप चैट में बदमाशी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग जैसे मामलों के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही हेल्पलाइन नंबर की जानकारी भी दी गई: 1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन 112 – आपातकालीन सेवा 1930 – साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन “कोर्ट वाली दीदी” पेटीका से मिलेगी मदद कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में स्कूलों में “कोर्ट वाली दीदी” नामक शिकायत और परामर्श पेटीका स्थापित की गई। यह पेटीका छात्रों को अपनी समस्याएं गोपनीय रूप से साझा करने का अवसर देगी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा। कार्यक्रम में स्कूलों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को जागरूक कर सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना था।