कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबीयत और 2 प्रसूताओं की मौत के बाद ड्रग डिपार्टमेंट ने उन दवाइयों के उपयोग पर रोक लगा दी है, जिनका उपयोग वहां हुआ था। ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने कोटा मेडिकल कॉलेज से गायनी वार्ड में (ऑपरेशन के बाद) उपयोग होने वाली 24 तरह की दवाइयों, उपकरणों के उपयोग पर रोक लगाई है। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने अलग-अलग पत्र लिखकर राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लि. (RMSCL), प्रदेश के तमाम दवाई विक्रेताओं (रिटेलर और हॉलसेलर) को आगाह किया है कि वे इन दवाइ्रयों की सप्लाई आगामी आदेशों तक नहीं करें। इनमें 15 ऐसी दवाइयां हैं, जो RMSCL की तरफ से मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत कोटा मेडिकल कॉलेज को सप्लाई की हैं। इसमें आईवी सेट (ग्लूकोस लगाने वाले), सिरिंज, ग्लूकोस की बोतल और कई तरह के इंजेक्शन हैं। स्थानीय 9 तरह की दवाइयां खरीदी गई इन 15 दवाइयों और उपकरण के अलावा कोटा मेडिकल कॉलेज के वार्ड में 9 तरह की अन्य दवाइयां (इंजेक्शन, ग्लूकोस बोतल, आईवी सेट-कैथेटर) भी उपयोग में ली गई। ये सभी दवाइयां मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर खरीद करके मरीजों में उपयोग की है। इन सभी की जांच रिपोर्ट आने तक उपयोग पर रोक ड्रग कंट्रोलर ने इन सभी दवाइयों के उपयोग, बेचान और सप्लाई पर आगामी जांच रिपोर्ट आने तक रोक लगाई है। ड्रग कंट्रोलर ने 15 दवाइयों की लिस्ट जारी करते हुए RMSCL के कार्यकारी निदेशक को पत्र लिखकर लिस्टेड दवाइयों की सप्लाई को अन्य दूसरे सरकारी हॉस्पिटल या मेडिकल कॉलेजों में नहीं करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बाजार में तमाम मेडिकल स्टोर, हॉलसेलर्स को भी उन 9 दवाइयों की लिस्ट सार्वजनिक करके बेचान करने से रोका है, जिनके सैंपल जांच के लिए उठाए गए हैं।