नगर निगम की ओर से शहर में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था की अब ऑनलाइन निगरानी शुरू कर दी गई है। इसके लिए निगम कार्यालय में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है, जहां से सभी टीपर वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इस सिस्टम के तहत हर टीपर में लगे जीपीएस को सीसीटीवी और मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है। कंट्रोल रूम में तैनात कार्मिक लगातार यह देख रहे हैं कि कौन सा टीपर किस वार्ड में पहुंचा, कितनी देर रुका और कचरा निर्धारित स्थान पर डाला या नहीं। हालांकि, इस हाईटेक निगरानी में एक बड़ी खामी भी सामने आई है—कई टीपर तय समय पर घरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे लोगों की शिकायतें बढ़ रही हैं। नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा के अनुसार पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग की जा रही है और इससे संचालन में पारदर्शिता आई है। लेकिन वर्तमान में टीपरों की संख्या जरूरत से काफी कम है। शहर में करीब 700 टीपर की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल सिर्फ 350 टीपर ही उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि इस कमी को दूर करने के लिए नए टीपर खरीदने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में 100 नए टीपर खरीदे जाएंगे। गौरतलब है कि पहले कोटा में 150 वार्ड दो नगर निगमों में बंटे हुए थे, लेकिन अब एक निगम बनने के बाद वार्डों की संख्या घटकर 100 रह गई है। इन वार्डों में करीब 3 लाख घर हैं, जहां से रोजाना कचरा संग्रहण का काम किया जाता है। फिलहाल एक टीपर को सुबह 4 से 5 घंटे के अंदर अधिकतम घरों तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण यह लक्ष्य हर जगह पूरा नहीं हो पा रहा। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि कचरा संग्रहण का संचालन ठेका फर्म के जरिए किया जा रहा है और मिल रही शिकायतों का समाधान संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों और निरीक्षकों के माध्यम से किया जा रहा है।