कोटा में नगर नगर निगम की ओर से संचालित गौशाला में सांड के हमले में कर्मचारी गोपाल भील की मौत के बाद आदिवासी समाज सड़कों पर उतर आया। शुक्रवार को आदिवासी समुदाय के लोगों और पीड़ित परिवार ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, 50 लाख का मुआवजा समेत परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। गौशाला में ड्यूटी के दौरान सांड ने किया था हमला प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि कुछ दिन पहले गौशाला में ड्यूटी के दौरान गोपाल भील पर एक सांड ने पीछे से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका उपचार चला, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। गोपाल भील परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मौत के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। पूर्व उप महापौर ने लापरवाही की आशंका जताई पूर्व उपमहापौर पवन मीणा ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उनका कहना है कि यदि गौशाला में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षित कर्मचारी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते तो इस हादसे को टाला जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में लापरवाही की आशंका है, जिसकी निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। ये है पांच प्रमुख मांगे ज्ञापन में प्रशासन से पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें घटना की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपए का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और गौशाला में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरण, बीमा और प्रशिक्षण की व्यवस्था शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।