कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन (प्रसव) के बाद महिलाओं की किडनी फेल होने के बेहद गंभीर मामले में नया मोड़ आ गया है। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती 5 पीड़ित महिलाओं में से 4 बुधवार को मीडिया के सामने आईं। महिलाओं ने रोते हुए कहा- हमें अस्पताल में भर्ती हुए 2 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। अब सरकार या तो हमारे किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करवाए, नहीं तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे। दो दिन पहले इन महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की थी और प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बाद, विरोध स्वरूप इन महिलाओं ने बुधवार से डायलिसिस कराने से साफ मना कर दिया है। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद फेल हुई थीं किडनियां गौरतलब है कि 4 से 8 मई के बीच कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में डिलीवरी के लिए ये महिलाएं भर्ती हुई थीं। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद इन सभी महिलाओं की किडनियां फेल हो गई थीं। इस मामले में पांचों महिलाएं अब भी अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) में भर्ती हैं। इन महिलाओं की किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं और इन्हें हर दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पीड़ित महिला रागिनी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा- हम यहां डिलीवरी के लिए आए थे। 4 मई को भर्ती किया गया था, आज 70 दिन से ज्यादा का समय हो गया है और हम अस्पताल में ही पड़े हैं। हर दो-तीन दिन में डायलिसिस होता है, जिसमें असहनीय दर्द और तकलीफ होती है। पीड़ित महिलाओं का दर्द और इच्छा मृत्यु की मांग पीड़ित महिला रागिनी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई डायलिसिस के दौरान हालत बहुत खराब हो जाती है, बार-बार बुखार आता है और तबीयत बिगड़ जाती है। हमारी बस यही मांग है कि हमारा किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। हम अस्पताल में जैसे (भले-चंगे) आए थे, हमें वैसे ही ठीक करके घर भेजा जाए। बीमारी के कारण घर पर सब परेशान हैं और पति की नौकरी तक छूट गई है। हम डायलिसिस के भरोसे कब तक जिंदा रहेंगे? या तो हमारा ट्रांसप्लांट कराओ या फिर हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो, अब यह दर्द सहन नहीं होता।" वहीं, दूसरी पीड़ित धन्नी बाई ने भी साफ कह दिया कि अब वे डायलिसिस नहीं करवाएंगी, चाहे अस्पताल में उनके साथ कुछ भी हो जाए। डायलिसिस का बहिष्कार और आईसीयू में भर्ती मरीज अपनी मांगों को लेकर महिलाओं ने अब इलाज का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। बुधवार को पिंकी और आरती का डायलिसिस होना था, लेकिन दोनों ने इसके लिए साफ मना कर दिया। इस बीच, डायलिसिस न होने के कारण बुधवार को आरती की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में आईसीयू (ICU) में शिफ्ट करना पड़ा। इसके बावजूद पीड़ित महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं कि जब तक सरकार किडनी ट्रांसप्लांट की लिखित गारंटी नहीं देती, वे डायलिसिस नहीं कराएंगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का पक्ष दूसरी ओर, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने इस मामले पर कहा- पांचों महिलाओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है और जरूरत के अनुसार उनका डायलिसिस किया जा रहा है। यह कहना संभव नहीं है कि डायलिसिस कब तक करना पड़ेगा। जब तक उनकी किडनियां खुद रिकवर नहीं हो जातीं, तब तक डायलिसिस करना बेहद जरूरी है। वैसे इन महिलाओं को अब अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है, सिर्फ डायलिसिस के लिए आना ही काफी है, लेकिन यहां रहने से भी हमें कोई आपत्ति नहीं है। जहां तक किडनी ट्रांसप्लांट का सवाल है, तो मरीज की स्थिति देखने के बाद 3 से 6 महीने बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।