कोटा जिले में पहले चरण में 4 पंचायत समितियों की 163 ग्राम पंचायतों में सरपंच चुनाव के दौरान मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। कई मतदाताओं की चूक के कारण वोट रिजेक्ट हुए। कई ग्राम पंचायतों में मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का विकल्प भी चुना। चारों पंचायत समितियों में सबसे ज्यादा 2343 वोट लेकर बपावरकलां ग्राम पंचायत में मानसिंह सरपंच निर्वाचित हुए। यहां 6 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। ये ग्राम पंचायत, सांगोद पंचायत समिति में आती है। लाडपुरा पंचायत समिति की डोल्या ग्राम पंचायत में मंजू बाई सबसे कम 319 वोट लेकर सरपंच बनीं। यहां सरपंच पद के लिए 11 प्रत्याशी मैदान में थे। खातौली में 345 वोट रिजेक्ट, गैता में 40 NOTA इटावा पंचायत समिति में मतदाताओं की संख्या के लिहाज से खातौली सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां 7815 मतदाताओं में से 6138 ने मतदान किया। इनमें 345 वोट रिजेक्ट हुए, जबकि 8 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। सरपंच पद के लिए यहां 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। वहीं, ढीपरी कालीसिंध सबसे छोटी ग्राम पंचायत है। यहां 1876 मतदाताओं में से 1511 ने वोट डाले। इनमें 53 वोट रिजेक्ट हुए और 10 मतदाताओं ने नोटा को वोट दिया। इटावा पंचायत समिति में गैता ग्राम पंचायत में सबसे ज्यादा 40 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। यहां की 42 ग्राम पंचायतों में मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना और कई जगह वोट भी रिजेक्ट हुए। मंडाना में 186 वोट रिजेक्ट हुए, 23 नोटा पर डले, 2 वोट से हार-जीत लाडपुरा पंचायत समिति में मतदाताओं की संख्या के लिहाज से गिरधरपुरा सबसे छोटी ग्राम पंचायत है। यहां कुल 766 मतदाता हैं। इस पंचायत में सरपंच सहित वार्ड पंच निर्विरोध निर्वाचित हुए। दूसरी ओर, मंडाना सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां 6379 मतदाताओं में से 4946 ने मतदान किया। इनमें 186 वोट रिजेक्ट हुए और 23 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। मंडाना में सरपंच पद के चुनाव में महज दो वोट के अंतर से हार-जीत हुई। लाडपुरा पंचायत समिति की मांदलिया ग्राम पंचायत में सबसे ज्यादा 227 वोट रिजेक्ट हुए, जबकि कसार में सर्वाधिक 95 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। यहां की 29 ग्राम पंचायतों में से 28 में मतदाताओं की चूक के कारण वोट रिजेक्ट हुए। सभी ग्राम पंचायतों में नोटा का भी इस्तेमाल हुआ। सांगोद -तेहरोली और कमोलर में नोटा नहीं, बपावरकलां में सबसे ज्यादा वोट रिजेक्ट सांगोद पंचायत समिति में मतदाताओं की संख्या के लिहाज से कनवास सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां 6104 मतदाताओं में से 4648 ने वोट डाले। इनमें 189 वोट रिजेक्ट हुए और 23 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। वहीं, कोटड़ी सबसे छोटी ग्राम पंचायत है। यहां 1848 मतदाताओं में से 1560 ने मतदान किया। इनमें 82 वोट रिजेक्ट हुए और 19 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। नाहरिया और विनोदखुर्द ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा 27-27 वोट नोटा के पक्ष में पड़े। बपावरकलां में सबसे ज्यादा 315 वोट रिजेक्ट हुए। सांगोद पंचायत समिति में दीगोद और मंडीता को छोड़कर सभी ग्राम पंचायतों में वोट रिजेक्ट हुए। वहीं, तेहरोली और कमोलर को छोड़कर सभी ग्राम पंचायतों में मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। सुल्तानपुर: 44 पंचायतों में NOTA को एक भी वोट नहीं सुल्तानपुर पंचायत समिति में मतदाताओं की संख्या के लिहाज से चौमा मालियान सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां 4084 मतदाताओं में से 3187 ने मतदान किया। वहीं, अमरपुरा सबसे छोटी ग्राम पंचायत है, जहां 1720 मतदाताओं में से 1474 ने वोट डाले।सुल्तानपुर पंचायत समिति की 44 ग्राम पंचायतों में किसी भी मतदाता ने नोटा का विकल्प नहीं चुना। हालांकि, बिनायका ग्राम पंचायत में 67 वोट रिजेक्ट हुए। यहां देखें कोटा में सरपंच चुनाव के नतीजे