ऑनलाइन ट्रेडिंग, शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गैंग के 3 आरोपियों को कोटा पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए 4 बैंक खातों में देशभर से करीब 70 करोड़ रुपए की साइबर ठगी से कनेक्शन मिला है। कोटा ग्रामीण पुलिस एसपी सुजीत शंकर ने बताया- पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत ठगों के नेटवर्क पर हमला किया। पिछले 10 दिन में 4 मामले दर्ज कर पुलिस ने 3 आरोपी महावीर नगर तृतीय निवासी नवनीत विजयवर्गीय (28) और तलवंडी निवासी सलमान अहमद खिलजी (25) को शुक्रवार को गिरफ्तार किया है। वहीं एक नाबालिग को निरूद्ध किया है। पुलिस ने आरोपियाें से 3 एंड्रॉयड मोबाइल और 3 सिम कार्ड जब्त किए। ऑनलाइन टास्क, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर गिराेह करता ठगी कोटा ग्रामीण पुलिस एसपी सुजीत शंकर ने बताया- राजस्थान पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिले में लगातार संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और फर्जी सिम कार्ड की जांच की जा रही है। जांच में सामने आया कि ठग देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकर ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग, शेयर मार्केट निवेश, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन टास्क पूरे कराने के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे थे। इसके लिए भोले-भाले लोगों के बैंक खाते, सिम कार्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक आरोपी के खाते में आए 58 करोड़ रुपए एसपी सुजीत शंकर ने बताया- सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के मोरपा निवासी एक व्यक्ति के दस्तावेज से सिम कार्ड निकलवाकर साइबर गिरोह को बेचने का मामला सामने आया। इन खातों से करीब 58 करोड़ रुपए के लेनदेन की जानकारी मिली है। वहीं खातौली निवासी युवक के बैंक खाते से करीब 1.69 करोड़ रुपए की ठगी राशि का ट्रांजेक्शन मिला। इसके अलावा तीसरे मामले में बूढ़ादीत क्षेत्र के आरोपी के खाते से 71 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी सामने आई। वहीं चौथे मामले में रामगंजमंडी के एक खाते में करीब 9.71 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन पाए गए। पुलिस ने सिम कार्ड, आधार शेयर नहीं करने की अपील की पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अपना सिम कार्ड, बैंक डिटेल, आधार, पैन या ओटीपी किसी को साझा न करें। नया सिम लेते समय बायोमेट्रिक प्रक्रिया पर नजर रखें और अपने नाम से जारी सिम कार्ड की जानकारी TAFCOP पोर्टल पर जरूर जांचें। साइबर अपराधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।