'कोटा के जे के लोन हॉस्पिटल ने 26 जून को वो सदमा दिया है, जिससे मैं और मेरी बेटी जिंदगीभर नहीं उभर पाएंगे। मेरी मासूम बेटी को ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) वाला संक्रमित ब्लड चढ़ा दिया गया। अब वो इस बीमारी के इलाज से तिल-तिल मर रही है। कोई दवाई नहीं लग रही, लगातार उल्टी कर रही है।' ये दर्द है उस परिवार का, जिसकी 8 साल की बेटी थैलेसीमिया (खून नहीं बनना) से पीड़ित है। हर महीने में 2-3 बार ब्लड चढ़ाना पड़ता था। आरोप है कि हॉस्पिटल ने लापरवाही से संक्रमित ब्लड चढ़ा दिया, जिससे बच्ची HIV पॉजिटिव हो गई है। ऐसा एक नहीं 2 बच्चों के साथ हुआ। दोनों परिवार सदमे में है। संक्रमित हुई एक मासूम के पिता ने लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। पढ़िए- पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए- क्या है पूरा मामला पिता ने बताया कि उनकी बेटी को 3 साल की उम्र से थैलेसीमिया है। शुरुआत में उसका इलाज कोटा के जे के लोन हॉस्पिटल में करा रहे थे। यहीं उसके आखिरी बार ब्लड चढ़ाया गया था। बीते एक साल से जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उसका आगे का ट्रीटमेंट करा रहे थे। उस इलाज के कारण बच्ची को ब्लड चढ़ना बंद हो गया था। दवाइयों से ही उसकी तबीयत सामान्य रहने लगी थी। पूरा परिवार इससे खुश था। फिर से टेस्ट कराया तो रिपोर्ट में पॉजिटिव मिली पीड़ित के पिता ने बताया कि 25 जून को कोटा के जे के लोन हॉस्पिटल में बच्ची का एक मेडिकल कार्ड बनवाने गया था। उसके लिए बच्ची के टेस्ट कराए थे। जांच की 26 जून को आई रिपोर्ट में बच्ची एचाआईवी पॉजिटिव मिली। साल 2023 में बच्ची की रुटीन जांचें कराई गई थी, तब उसकी एचआईवी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। परिवार का कहना है करीब 15 दिन से बच्ची का एचाआईवी को लेकर ट्रीटमेंट शुरू हुआ। है। उसके बाद से उसकी तबीयत लगातार खराब हो रही है। झूला झूलना पसंद, लेकिन अब उठ भी नहीं पा रही जयपुर में बेटी की जांच करवाने आए पिता ने बताया कि बेटी का इसी साल तीसरी क्लास में एडमिशन करवाया है। नई क्लास में जाने लेकर वो बहुत खुश थी। उसे आम बच्चों की तरह खेलना पंसद है। झूला मिल जाए तो काफी देर तक झूलती रहती थी। थैलेसीमिया होने के बाद उसने खेलना कभी नहीं छोड़ा। लेकिन हॉस्पिटल ने उसे ऐसी बीमारी दे दी है कि स्कूल जाना और खेलना तो दूर, खाना भी नहीं निगल पा रही। उसकी सेहत लगातार गिर रही है। बेटी बार-बार पूछती है- पापा मुझे क्या हुआ? HIV की दवाइयां लेने के कारण वो एकदम सुस्त हो गई है। उसे बार-बार उल्टी हो रही है। कुछ दिन पहले डायरिया भी हुआ था। बच्ची हमसे पूछती है- पापा मुझे क्या हुआ है, हम उसे क्या जवाब दें? मेरी बेटी कब ठीक होगी? उसका भविष्य क्या है? इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं हैं, यही सोच-सोचकर परिवार सदमे में है। मासूम की हंसी से ही हमारे घर में रौनक रहती थी, अब उसके चुपचाप होने से माहौल एकदम शांत सा हो गया है। लापरवाही करने वालों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई : पिता बेटी की जांच पॉजिटिव आने के बाद हम दोनों पति-पत्नी का भी टेस्ट कराया गया। लेकिन हमारी रिपोर्ट निगेटिव आई है। परिवार ने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जांच और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा- हमारी बच्ची पहले से बीमार थी, अब हॉस्पिटल ने उसका इलाज करने की बजाय मौत से भी बदतर एक और खतरनाक बीमारी दे दी है। जिम्मेदार बोले निर्देश दिए हैं राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी (RSACS) के डायरेक्टर डॉ सुशील परमार का कहना है कि मामले में जांच की जा रही है। उन्होंने बताया- ब्लड सेंटर जाकर रिकॉर्ड और प्रोसीज़र की जांच की है। गाइडलाइन के अनुसार फोर्थ जनरेशन एलाइजा टेस्ट और नेट टेस्टिंग किया जा रहा है। इन दो मामलों में अब सभी डोनर को ट्रेस किया जा रहा है। जिसके लिए जॉइंट डायरेक्टर को निर्देश दिए है। थैलेसीमिया क्या है? यह एक वंशानुगत ब्लड डिसऑर्डर है। यह हमारे शरीर की हीमोग्लोबिन बनाने की क्षमता को प्रभावित करता है। लाल रक्त कोशिकाओं में एक प्रोटीन होता है, जिसे हीमोग्लोबिन कहते हैं। खून के जरिए पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम इसी प्रोटीन का है। इससे शरीर की अन्य कोशिकाओं को पोषण मिलता है। अगर किसी को थैलेसीमिया है तो उसकी बोन मैरो लाल रक्त कोशिकाएं कम बना पाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि एनीमिया की स्थिति बन जाएगी। इसके अलावा ऑक्सीजन से वंचित होकर शरीर की अन्य कोशिकाओं की ऊर्जा कम हो जाएगी। यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। राजस्थान में चार हजार बच्चों को थैलेसीमिया स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में फिलहाल करीब 4 हजार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। जिन्हें नियमित रुप से ब्लड चढाना पड़ता है। हालांकि अब थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का इलाज बौनमेरो ट्रांसप्लांट के जरिए होने लगा है। लेकिन इसके लिए मैचिंग होनी जरूरी होती है। …. कोटा से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… कोटा मेडिकल कॉलेज में हुई हर मौत की वजह अलग:सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की जान गई थी, जांच रिपोर्ट आई कोटा में 5 प्रसूताओं (महिलाओं) की मौत के असल कारण सामने आ गए हैं। 3 अलग-अलग जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर हाई लेवल कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। पूरी खबर पढ़िए…