कोटा में महिला की हत्या के करीब 21 महीने पुराने मामले में कोर्ट (अपर सेशन न्यायाधीश क्रम 4) ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हत्या के आरोपी दूसरे पति मुकेश वाल्मीकि को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने माना की FSL रिपोर्ट पूरी घटना को आरोपी से जोड़ने में असमर्थ है। केवल एक लिंक पर्याप्त नहीं है। मामले में FIR देने वाला मृतका का बेटा विकास से लेकर मृतका का भाई, बहनोई व अन्य रिश्तेदार और गवाह के भी बयान बदल गए हैं। FSL जांच में मृतका का डीएनए आरोपी दूसरे पति की शर्ट पर मिले खून में पाया गया था। लेकिन मृतका के शरीर व कपड़ों में मिला सैम्पल आरोपी के डीएनए से मैच नहीं हुआ। मतलब मृतका का खून आरोपी की शर्ट पर मिला है, लेकिन आरोपी द्वारा मृतका के साथ रेप करने संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिला। अलग-अलग जगह पर एक से ज्यादा पुरुषों का डीएनए मिला है। आरोपी से बरामद पत्थर पर भी मृतका के खून से संबधित सबूत नहीं मिले। कोर्ट ने 20 अप्रैल को सुनाए फैसले में सबूत के अभाव में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया। कोर्ट में 19 गवाहों के बयान हुए और 31 दस्तावेज पेश किए गए। ये था मामला पहले पति की मौत के बाद महिला 6-7 साल से दूसरे पति के साथ रह रही थी। दोनों कचरा व थैली बीनने का काम करते थे। 5 जुलाई 2024 को एक खाली प्लॉट में महिला का लहूलुहान हालत में शव मिला था। उसके सिर पर चोट के निशान थे। शव को छिपाने के लिए 20 से 30 फीट दूर पत्थर व कचरे वाली जगह पर पटक दिया था। सूचना पर पुलिस, एफएसएल और डॉग स्क्वॉयड टीम ने मौके पर जाकर जांच की। FSL टीम को मौके पर एक जोड़ी चप्पल,एक जोड़ी पायल, दो खाली सादा शराब के नींबू के प्लास्टिक के पव्वा,एक सादा देशी शराब का पव्वा और लाल व नीले रंग के ढक्कन मिले थे। हत्या के बाद महिला के बेटे ने मुकेश पर हत्या का शक जताते हुए पुलिस को रिपोर्ट दी थी। पुलिस ने जांच के बाद दूसरे पति को गिरफ्तार किया।उसकी निशान देही पर खून लगी शर्ट व वारदात में काम में लिया पत्थर जब्त किया था।