कोटपूतली में आरजीएचएस योजना के निजीकरण (इंशोरेंस मोड) के विरोध में कर्मचारी महासंघ द्वारा कल, 12 मई को जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान शव यात्रा निकाली जाएगी और चिकित्सा मंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। इसके अलावा, 15 से 25 मई तक चिकित्सा मंत्री के राजकीय दौरों का बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। कोटपूतली-बहरोड़ संयुक्त कर्मचारी महासंघ के जिला संयोजक बाबूलाल गुर्जर ने बताया कि आरजीएचएस योजना का वार्षिक खर्च 2021-22 में 600 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 तक 4300 करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने इस बेतहाशा वृद्धि का मुख्य कारण योजना की निगरानी में कमी बताया। गुर्जर के अनुसार, 4300 करोड़ रुपए की इस योजना के संचालन और निगरानी के लिए राज्य स्तर पर केवल 34 कर्मचारियों और अधिकारियों का दल गठित है। रोजाना लगभग 50 हजार कर्मचारी इलाज के लिए जाते हैं और उनकी टीआईडी जेनरेट होती है। इतने कम कर्मचारियों द्वारा लगभग 10 हजार मेडिकल संस्थानों, अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स की चिकित्सा सेवाओं की निगरानी करना असंभव है, जिसके कारण बिना उचित सत्यापन के करोड़ों रुपए के बिलों का भुगतान किया जाता है। कोटपूतली-बहरोड़ संयुक्त महासंघ के कर्मचारी नेताओं, जिनमें दिनेश शर्मा, लेखराम गुर्जर, रामकुंवार यादव, बुधराम कसाना, प्रकाश गुर्जर, रामावतार, मालीराम, प्रताप सिंह सैनी, राजेश यादव, श्योराम गुर्जर, रणवीर, जयद्रथ यादव, अंजू यादव, दिनेश हथवाला, कमल गुर्जर और साधुराम जाट शामिल हैं, ने स्पष्ट किया कि यदि इंश्योरेंस कंपनियां प्रभावी निगरानी से भ्रष्टाचार और गलत खर्च पर अंकुश लगा सकती हैं, तो सरकारी कर्मचारी भी यह कार्य कर सकते हैं। उन्होंने इसके लिए 500 कर्मचारियों-अधिकारियों की एक अलग स्टाफ सेल बनाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार योजना का निजीकरण करने का प्रयास करती है, तो प्रदेश भर के कर्मचारी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।