कोटपूतली-विराटनगर वन मंडल में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुरू हुई 24 घंटे की विशेष वन्यजीव गणना सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। इस बार की गणना में पैंथर सहित कई वन्यजीव प्रजातियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वन विभाग ने इसे संरक्षण के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना है। पैंथर परिवार बढ़ने के संकेत रेंजर सतपाल ढीलान के अनुसार पिछले वर्ष क्षेत्र में 9 पैंथर थे, जो इस बार बढ़कर 11 हो गए हैं। गणना के दौरान तीन शावकों की आवाज भी सुनाई दी, जिससे पैंथर परिवार के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। कैसे हुई 24 घंटे की गणना वन्यजीव गणना के लिए वाटर होल पद्धति, ट्रैप कैमरों और लगातार निगरानी का सहारा लिया गया। इस अभियान में कुल 22 वनकर्मियों की टीम तैनात रही। निगरानी के लिए कर्मचारियों को पेड़ों और ऊंचे स्थानों पर बने मचानों पर बैठाया गया, जहां से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। पूरे क्षेत्र को बुचारा, कोटपूतली और पावटा नाकों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक प्वाइंट पर दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई, जिन्होंने 24 घंटे तक लगातार मॉनिटरिंग की। पूर्णिमा की रात चांदनी अधिक होने से दृश्यता बेहतर रही। इससे वन्यजीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने और आंकड़े जुटाने में मदद मिली। इन प्रजातियों में बढ़ोतरी रही खास इन वन्यजीवों की संख्या घटी गणना के दौरान कुछ वन्यजीव प्रजातियों की संख्या में गिरावट भी दर्ज की गई। नीलगाय की संख्या पिछले वर्ष 447 थी, जो इस बार घटकर 428 रह गई। वहीं सेही (पोर्क्यूपाइन) की संख्या में सबसे ज्यादा कमी देखने को मिली, जो 18 से घटकर केवल 4 रह गई है। वन विभाग के अनुसार इन आंकड़ों के आधार पर अब वन्यजीव संरक्षण, जल स्रोतों के विकास और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति तैयार की जाएगी।