कूनो नेशनल पार्क से रणथंभौर नेशनल पार्क की फलौदी रेंज में आया चीता केपी-2 लगातार चौथे दिन भी कैलाशपुरी और मोजीपुरा गांवों के आसपास सक्रिय है। चीते की मौजूदगी के कारण स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों में भय का माहौल है, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। चीता केपी-2 कैलाशपुरी और मोजीपुरा के अमरूद के बगीचों और बाजरे के खेतों में देखा जा रहा है। वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष रमेश गुर्जर और महिला सुरक्षा समिति के उपाध्यक्ष केदार गुर्जर ने बताया कि चीते के लगातार मूवमेंट से किसान अपने खेतों में जाने से डर रहे हैं। खेतों में बाजरा, भिंडी, लौकी और पशुओं के लिए चारा व साग-सब्जियां बोई गई हैं। चीते के डर से किसान पिछले चार दिनों से खेतों में पानी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे फसलें सूखने लगी हैं और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। हरे चारे की कमी के कारण दुधारू पशुओं जैसे गाय और भैंस के दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आर्थिक संकट गहरा सकता है।