अजमेर रोड स्थित ठिकरिया टोल प्लाजा पर फास्टैग होने के बावजूद वाहन चालकों को टोल पार करने में 5 से 8 मिनट लग रहे हैं। पीक समय में वाहनों की लंबी कतार लग रही है। इसकी वजह वाहनों की बढ़ती संख्या के मुकाबले टोल लेन का विस्तार नहीं होना है। टोल शुरू होने के बाद वाहनों की संख्या तीन गुना बढ़कर रोजाना करीब 48 हजार पहुंच गई, लेकिन नई लेन बनाने की योजना आठ साल से अटकी है। एनएचएआई ने वर्ष 2018 में जमीन अधिग्रहण कर डीपीआर भी तैयार कर ली थी। इसके बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब एनएचएआई फास्टैग से गुजरने वाले वाहनों का विश्लेषण कर रहा है। ट्रैफिक दबाव की रिपोर्ट आने पर ही नई लेन बढ़ाने की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट आने पर बढ़ाएंगे लेन टोल लेन बढ़ाने के लिए जमीन अधिग्रहण कर ली है। अब फास्टैग से निकलने वाले वाहनों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसमें ट्रैफिक दबाव होने की रिपोर्ट आती है तो टोल लेन बढ़ाने की कार्रवाई की जाएगी। -अजय आर्य, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई, जयपुर पीक समय में टोल पर वाहनों की कतार लग रही ठिकरिया टोल प्लाजा शुरू हुआ, तब रोजाना करीब 16 हजार वाहन गुजरते थे। उस समय 12 लेन थीं। इनमें 6 आने और 6 जाने वाले वाहनों के लिए थीं। बाद में वाहनों की संख्या करीब 30 हजार प्रतिदिन पहुंचने पर लेन बढ़ाकर 14 कर दी गईं। अब रोजाना करीब 48 हजार वाहन गुजर रहे हैं। यानी शुरुआत के मुकाबले वाहनों की संख्या तीन गुना हो गई, जबकि लेन सिर्फ दो बढ़ी हैं। 2023 में टोल वसूली करने वाली कंपनी बदली, लेन विस्तार नहीं हुआ ठिकरिया टोल पर पहले जीवीके कंपनी टोल वसूली करती थी। कंपनी ने वर्ष 2023 तक टोल वसूला। इसके बाद एनएचएआई ने रिद्धी-सिद्धी कंपनी को टोल वसूली का काम सौंप दिया। नई लेन के निर्माण के लिए एनएचएआई और टोल कंपनी को डीपीआर के अनुसार काम आगे बढ़ाना था। लेकिन कंपनी बदलने के बाद भी लेन विस्तार का काम शुरू नहीं हो सका। टोल पर दबाव 16 हजार वाहन रोजाना गुजरते थे शुरुआत में। 48 हजार वाहन प्रतिदिन गुजर रहे हैं अब। 12 लेन थीं शुरुआत में, 6 आने और 6 जाने की। 14 लेन हैं अभी। 2018 में नई लेन के लिए जमीन अधिग्रहण। 2-2 नई लेन दोनों तरफ बनाने की योजना। 8 साल से डीपीआर तैयार, निर्माण शुरू नहीं। 5-8 मिनट लग रहे हैं फास्टैग के बावजूद।