शैलेश वासु | बाड़मेर जिला अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला एक बड़ा रेफर स्कैंडल सामने आया है। अस्पताल में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को जोधपुर रेफर करने के बजाय पैरामेडिकल स्टाफ, दलालों और निजी एंबुलेंस चालकों की मिलीभगत से धोखे से गुजरात के पालनपुर स्थित निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। इस कमीशनखोरी के खेल में प्रति मरीज 40 से 50 हजार रुपए तय हैं। हद तो तब हो गई जब अस्पताल के सरकारी रेफर कार्ड मुख्य द्वार के पास स्थित चाय की थड़ियों से बरामद हुए। जिला अस्पताल से रोज 10 से 12 मरीज रेफर किए जाते हैं। अस्पताल अधीक्षक को मिली शिकायत के बाद गठित टीम ने मौके से 10-12 रेफर कार्ड जब्त किए, जिन्हें संविदाकर्मी नर्सिंग स्टाफ रामलाल द्वारा वहां छिपाकर रखा गया था। इस खुलासे ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सब्जेखान। बाड़मेर. चाय की थड़ी पर कार्रवाई करती डॉक्टर टीम और चाय की थड़ी पर रखे जिला अस्पताल के रेफर कार्ड । मांगीलाल। शास्त्रीनगर निवासी मांगीलाल (35) 13 अप्रैल को गंभीर घायल हुआ था। परिजन जिला अस्पताल लाए तो वहां पहले से ही निजी एंबुलेंस तैयार थी। ड्राइवर फरीद ने सिणधरी चौराहे तक पहुंचते-पहुंचते परिजनों को पालनपुर के एप्पल हॉस्पिटल चलने की सलाह दी। मात्र 15 घंटे में अस्पताल ने ब्रेन हेमरेज का बहाना बनाकर 1.33 लाख रुपए का बिल थमा दिया, जबकि जोधपुर के डॉक्टरों ने बाद में उसे महज फ्रैक्चर बताया। सिणधरी निवासी सब्जे खान (25) को दिसंबर 2025 में हादसे के बाद हायर सेंटर रेफर किया। परिजन उसे जोधपुर एम्स ले जाना चाहते थे, लेकिन एंबुलेंस में मौजूद फर्जी नर्सिंग स्टाफ फरीद खान ने उन्हें गुजरात चलने के लिए मना लिया। सांचौर में पट्टी बांधने के 12 हजार, पालनपुर में इलाज के 52 हजार रुपए ऐंठ लिए गए। 7 लाख रुपए खर्च होने के बाद पैर ठीक नहीं हुआ। एम्बुलेंस ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी ने अधीक्षक डॉ. हनुमानराम चौधरी और प्राचार्य डॉ. अनूपसिंह गुर्जर को ज्ञापन देकर जेठाराम, जसराज मूंढ, भानुप्रताप, सुरेश, मेहबूब, रजाक और नरपत सिंह जैसे स्टाफ पर मरीजों को गुजरात भगाने का आरोप लगाया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. चौधरी ने कहा कि शिकायत के बाद चाय की थड़ी से 10-12 रेफर कार्ड जब्त कर लिए गए हैं। जिन्हें संविदाकर्मी नर्सिंग स्टाफ के द्वारा वहां छिपाकर रखा गया था। पूरे मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। आमतौर पर फील्ड स्टाफ 108 एंबुलेंस के माध्यम से हादसे की सूचना जिला अस्पताल भेजते हैं ताकि डॉक्टर तैयार रहें। लेकिन इस सूचना का इस्तेमाल दलाल कर रहे हैं। मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही निजी एंबुलेंस इमरजेंसी के बाहर खड़ी हो जाती हैं। जैसे ही डॉक्टर गंभीर हालत देखते हुए जोधपुर के लिए रेफर कार्ड बनाता है, नर्सिंग स्टाफ और दलाल परिजनों को यह कहकर गुमराह करते हैं कि जोधपुर में इलाज में देरी होगी। कमीशन के चक्कर में उन्हें सीधे पालनपुर के महंगे निजी अस्पतालों की तरफ मोड़ दिया जाता है।