राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से रविवार को आयोजित एलडीसी भर्ती परीक्षा में जयपुर में उपस्थिति के आंकड़ों ने पहले तो हैरान कर दिया। बाद में सही आंकड़े जारी किए गए। दरअसल पहले जो आंकड़े जारी किए गए। उसके अनुसार जयपुर में पहली पारी में 64298 अभ्यर्थी और दूसरी पारी में 66893 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। यानी दूसरी पारी में 2595 अभ्यर्थी बढ़ गए। यह संभव नहीं था। दैनिक भास्कर ने जब इस आंकड़े को बोर्ड को बताया तो रिवाइज आंकड़े जारी किए गए। प्रदेश के 38 जिलों में परीक्षा हुई थी, लेकिन उपस्थिति केवल जयपुर में ही बढ़ी अक्सर यह होता है कि अगर किसी भर्ती में दो पेपर होते हैं तो पहला पेपर गलत हो जाता है तो दूसरी पारी में कई अभ्यर्थी परीक्षा नहीं देते। यानी पहली पारी के मुकाबले दूसरी पारी में उपस्थिति कम हो जाती है, लेकिन बढ़ती नहीं है, लेकिन रविवार को चयन बोर्ड उपस्थिति के जो आंकड़े जारी किए, उसके अनुसार जयपुर में पहली पारी में परीक्षा नहीं देने वाले 2595 अभ्यर्थी दूसरी पारी में परीक्षा देने पहुंच गए। इससे दूसरी पारी में उपस्थिति बढ़ गई। इस मामले पर जब बोर्ड अध्यक्ष से बात की तो उन्होंने कहा कि ऐसा संभव नहीं है कि दूसरी पारी में उपस्थिति बढ़ जाए। प्रदेश के 38 जिले में परीक्षा हुई थी, लेकिन उपस्थिति केवल जयपुर में ही बढ़ी थी। शेष 37 जिलों में उपस्थिति कम रही थी। बोर्ड ने तुरंत इस मामले पर एक्शन लिया और जयपुर में आंकड़ों की जांच कराई तो सही स्थिति सामने आई। दरअसल जयपुर में पहली पारी मे 67490 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, लेकिन गलती से यह आंकड़ा 64298 जारी कर दिया गया। बाद में जब रिवाइज आंकड़ा जारी किया तो जयपुर में दूसरी पारी में उपस्थिति घट गई थी 597 अभ्यर्थी कम पहुंचे थे। पहली पारी में उपस्थिति 71.44 प्रतिशत की बजाय 74.99 प्रतिशत पहुंच गई। दूसरी पारी में उपस्थिति 74.32 प्रतिशत रही। जयपुर में परीक्षा के लिए 234 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों पर 90001 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इसलिए नहीं बढ़ सकते अभ्यर्थी; कोई भी अभ्यर्थी केवल एक पेपर के भरोसे सलेक्ट नहीं हो सकता। इसलिए अगर कोई पहले पेपर में नहीं आया तो वह दूसरा पेपर देकर परीक्षा में सलेक्ट नहीं हो सकता। इसलिए पहला पेपर नहीं देने वाला दूसरा पेपर देने भी नहीं आता है। “किसी परीक्षा में दो पेपर होते हैं तो दूसरी पारी में उपस्थिति या तो पहली पारी जितनी ही रहती है या इससे कम हो जाती है, लेकिन बढ़ती नहीं है। जैसे ही जयपुर में दूसरी पारी मे उपस्थिति बढ़ने का पता चला तो सामने आया कि पहली पारी के आंकड़ों में कुछ मिसटेक हो गई थी। इसे रिवाइज कर दिया गया और सही आंकड़े जारी कर दिए गए।” - आलोक राज, अध्यक्ष, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड