पवन शर्मा | चूरू यमुना का पानी शेखावाटी में लाने की तैयारी हो चुकी है। हरियाणा के ताजेवाला हेड से चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के हांसियावास गांव तक पानी लाने लिए 265 किमी पाइप लाइन डाली जाएगी। इसे लेकर सर्वे डिजाइन का काम पूरा कर लिया गया है। हरियाणा के पांच जिलों से होकर चूरू जिले में प्रवेश करने वाली इस पाइप लाइन से पेयजल के अलावा चूरू, सीकर व झुंझनू जिलों के करीब एक लाख पांच हजार हैक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पानी का रिसाव पाइप लाइन के कारण शून्य रहेगा। वहीं पाइप लाइन के ऊपर किसान खेती भी कर सकेंगे। पाइपलाइन को सुरक्षा के लिहाज से जमीन से दो मीटर नीचे दबाया जाएगा। पाइप का व्यास 3200 एमएम होगा। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि मानसून के दौरान यमुना के अतिरिक्त पानी को बगैर किसी पंपिंग मशीन के तेजी से स्टोर किया जा सके। प्रोजेक्ट की शर्त है कि राजस्थान को पानी तभी दिया जाएगा, जब यह हरियाणा की जरूरत 24 हजार क्यूसेक से अधिक होगा। बतादें कि इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 38 हजार करोड़ रुपए है। नरवाना हरियाणा की 24 हजार क्यूसेक जरूरत के बाद पानी मिलेगा रिसाव बिल्कुल नहीं (पाइप लाइन की खासियत) लाडवा हांसियावास (राजगढ़) पेयजल लागत 38 हजार करोड़ रुपए 335 एमसीएम कैथल ताजेवाला यमुनानगर से शुरू होकर यह पाइपलाइन कुरुक्षेत्र के लाडवा, कैथल, नरवाना और हिसार के चौधरीवास होते हुए राजस्थान की सीमा में चूरू के हांसियावास तक आएगी। इस पाइप लाइन के निरीक्षण के लिए इसके साथ करीब साढ़े सात मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी तकनीकी गड़बड़ी को रोकने के लिए इस सड़क मार्ग से मौके पर कुछ देर में पहुंचकर जांच कर सकेंगे। चूंकि लाइन के ऊपर किसान खेती कर सकेंगे, वहीं बराबर से सड़क से लाइन से छेड़छाड़ का पता चल सकेगा। इसलिए यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज से हांसियावास डैम तक सड़क बनाएंगे। वहीं हरियाणा सरकार का प्रयास है कि इस सड़क को चार लेन का बनाया जाए। अभी डीपीआर तैयारी के समय इसका प्रावधान होने की संभावना है। प्रोजेक्ट का डिजाइन करने वाली एजेंसी के अनुसार यमुनानगर के ताजेवाला हेड से राजस्थान तक पानी लाने के लिए हरियाणा में 159 सड़क, 31 नहर एवं 7 रेलवे क्रॉसिंग को पार करके पानी पाइपलाइन से हांसियावास पहुंचेगा। पाइप लाइन के अंतिम छोर यानी चूरू के हांसियावास में बड़ा रिजर्व वायर (स्टोरेज तालाब) बनाया जाएगा। इसकी कुछ जल भंडारण क्षमता 335 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) होगी। एक मिलियन क्यूबिक में करीब 100 करोड़ लीटर पानी की क्षमता अनुमानित आंकी है। इस पानी से रबी और खरीफ की फसलों के लिए करीब 1,05,000 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। पाइप लाइन जमीन से दो मीटर नीचे रहेगी। करीब 60 मीटर चौड़ी 9329 एकड़ जमीन का अस्थाई अधिग्रहण किया जाएगा। वहीं साढ़े सात मीटर चौड़ी रोड व दूसरे कामों के लिए करीब 500 एकड़ जमीन का स्थाई रूप से अधिग्रहण करने की जरूरत होगी। यदि सड़क को चार लेन का किया तो जमीन का स्थाई अधिग्रहण 900 एकड़ पहुंच सकता है। {प्रोजेक्ट से जुड़े एक इंजीनियर ने बताया कि एजेंसी ने कुरुक्षेत्र में अपना ऑफिस बनाया है। अभी तैयार प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मांगी गई है। वहीं डीपीआर को तैयार करने का काम भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में फारेस्ट लैंड का इश्यू नहीं आएगा, क्योंकि जो रेलवे लाइन या नहरों के पास वन क्षेत्र प्रभावित होगा, इसके बदले प्रस्तावित रोड के साथ पेड़ लाए जा सकते हैं। चौधरीवास हांसियावास रिजर्ववायर क्षमता ताजेवाला हेड सिंचाई : 1.05 लाख हैक्टे. (चूरू, सीकर व झुंझुनूं)