डूंगरपुर| करावाड़ा ग्राम पंचायत की रात्रि चौपाल में औपचारिक बैठक की बजाय ग्रामीणों की नाराजगी और प्रशासन की जवाबदेही का आमना-सामना हो गया। करावाड़ा के स्कूल परिसर में ग्रामीण जुटे और जैसे ही कलेक्टर देशलदान पहुंचे, माहौल सवालों और शिकायतों से गरमा गया। ग्रामीणों ने एक-एक कर अपनी समस्याएं रखनी शुरू कीं। इसमें कहीं सूखी नहरें, कहीं खाद की कमी, तो कहीं स्कूल में शिक्षक कमी की समस्या उठाई। भीड़ में से भी आवाजें उठीं चार साल से खाद नहीं मिली, नहर टूट रही है, फसल सूख रही है, पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। चौपाल का माहौल ऐसा था कि हर विभाग पर सीधे सवाल उठ रहे थे। इस अवसर पर सीईओ हनुमान सिंह राठौड़ भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राशन वितरण व्यवस्था में अनियमितताएं हैं और जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों पर ध्यान नहीं देते। जब कलेक्टर ने मौके पर रसद अधिकारी और प्रवर्तन निरीक्षक की उपस्थिति जांची, तो दोनों अनुपस्थित पाए गए। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कलेक्टर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निरीक्षक के खिलाफ निलंबन के निर्देश दिए। इस फैसले के बाद चौपाल में सन्नाटा छा गया। चौपाल में ग्रामीणों ने बताया कि 1.72 रुपए करोड़ की सिंचाई योजना के बावजूद नहरों में रिसाव हो रहा है। 4 साल से यूरिया-डीएपी की खाद नहीं मिल रही। फसल खरीद केंद्र नहीं होने से किसानों को कम दाम मिलता है। वहीं पेयजल संकट से गर्मी में हालात खराब हो रही है। स्कूल में 19 पद खाली होने के साथ भवन की सुविधा नहीं है। पीएचसी अधूरा होने से इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने गांवों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग उठाई। इस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। चौपाल में कलेक्टर ने कहा कि अब फाइल नहीं, फील्ड में काम दिखना चाहिए।