विश्वविख्यात पर्यटन नगरी जैसलमेर और नियमित हवाई सेवाओं का तालमेल एक बार फिर पटरी से उतरता नजर आ रहा है। पर्यटन सीजन की शुरुआत के साथ ही एयरलाइंस कंपनियों के मनमाने फैसलों ने स्थानीय पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका दिया है। आगामी 26 अक्टूबर से जैसलमेर एयरपोर्ट से उड़ानों का संचालन शुरू तो होने जा रहा है। जिसके तहत दिल्ली के लिए तीन और मुम्बई के लिए दो फ्लाइट चलेगी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार शनिवार और रविवार यानी वीकेंड पर फ्लाइट्स का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा। हवाई कंपनियों का यह फैसला पर्यटन व्यवसायियों की समझ से परे है, क्योंकि जैसलमेर का पूरा पर्यटन ढांचा मुख्य रूप से वीकेंड टूरिज्म पर टिका हुआ है। मेट्रो शहरों से आने वाले पर्यटक शुक्रवार शाम या शनिवार सुबह आकर रविवार तक लौटते हैं। ऐसे में पीक दिनों में ही उड़ानों को बंद रखना स्वर्णनगरी की अर्थव्यवस्था पर चोट करने जैसा है। { इस सीजन का अनुमान: वीकेंड पर उड़ानों के बंद रहने से इस बार हवाई यात्रियों की संख्या 70 हजार घटेगी। ^दिल्ली व मुम्बई के लिए फ़्लाइट संचालन शुरू होने जा रहा है। फिलहाल शेड्यूल में सप्ताह में 5 दिन ही फ्लाइट का संचालन होगा। - अनिल जाजोरिया, निदेशक, एयरपोर्ट ऑथोरिटी { आईटी हब और दक्षिण भारत के पर्यटकों ने जैसलमेर को पहली पसंद बनाया। इसके बावजूद, इस बार जारी विंटर शेड्यूल से बैंगलुरू की फ्लाइट को पूरी तरह गायब कर दिया है। एयरलाइंस द्वारा अधिक मुनाफे वाले और फुल ऑक्यूपेंसी वाले रूट को बंद करने का तर्क किसी के गले नहीं उतर रहा है। { गत सीजन का रिकॉर्ड: पिछले वर्ष 6 उड़ानों का संचालन हुआ था, जिसमें 2.50 लाख यात्रियों ने हवाई सफर किया था। जैसलमेर आने वाले घरेलू पर्यटकों में सबसे बड़ा हिस्सा गुजरात का रहता है। हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए दो वर्ष पहले अहमदाबाद और सूरत से जैसलमेर के बीच सीधी उड़ानें शुरू की गई थीं। उस समय इन उड़ानों को जबरदस्त यात्री भार मिला था। गत वर्ष की तरह इस बार भी अहमदाबाद और सूरत को विंटर शेड्यूल में जगह नहीं दी। जैसलमेर के होटल व्यवसायी, टूर ऑपरेटर, कैमल सफारी संचालक और गाइड इस निर्णय से बेहद मायूस है। हर साल कंपनियां बिना किसी ठोस आधार के अपने फैसले बदल देती है। { विमानन कंपनियों के फैसलों की विसंगति का सबसे बड़ा उदाहरण बैंगलुरू रूट है। गत विंटर सीजन में दक्षिण भारत से पर्यटकों को सीधे जोड़ने के लिए शुरू की गई 180 सीटर बैंगलूरू-जैसलमेर फ्लाइट को ऐतिहासिक रेस्पॉन्स मिला था। पूरे सीजन में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब विमान में सीटें खाली रही हो।