मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल में महिलाओं के सबसे संवेदनशील और गंभीर रोग स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी जांच जैसी जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं है। स्थिति यह है कि स्क्रीनिंग के दौरान जिन महिलाओं में स्तन कैंसर का संदेह पाया जाता है, उन्हें अपनी जान बचाने के लिए मजबूरी में जोधपुर जैसे हायर सेंटर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बाड़मेर में मेडिकल कॉलेज का पहला बैच 2019 में आया है लेकिन मैमोग्राफी जैसी जरूरी जांच की सुविधा नहीं है। 2.60 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग लेकिन सस्पेक्टेड के डाटा गायब कागज पर आंकड़े, धरातल पर मरीजों की बेबसी: एनसीडी प्रोग्राम के तहत गांवों और शहरी क्षेत्रों में आशा सहयोगिनियों व एएनएम के जरिए महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच के निर्देश हैं। नियमानुसार यदि स्क्रीनिंग में किसी महिला में स्तन में गांठ या अन्य शुरुआती लक्षण मिलते हैं, तो उसे तुरंत मैमोग्राफी के लिए जिला अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए। लेकिन जिला अस्पताल में मशीन न होने के कारण डॉक्टरों के लिए यह मुमकिन नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाली गरीब तबके की महिलाएं जब जिला अस्पताल पहुंचती हैं, तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स में मैमोग्राफी टेस्ट पर 1,000 से 4,000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। स्तन कैंसर के निदान के लिए मैमोग्राफी जांच जरूरी: विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि मैमोग्राफी एक विशेष प्रकार की एक्स-रे तकनीक है, जो स्तनों के अंदरूनी ऊतकों की बारीकी से जांच कर कैंसर के शुरुआती लक्षणों का शुरुआती चरण में ही पता लगा लेती है। गाइडलाइन के अनुसार 40 वर्ष की आयु से हर महिला को नियमित रूप से हर साल या हर दो साल में मैमोग्राफी जरूर करवानी चाहिए। पुरानी बिल्डिंग में चल रहा सिविल वर्क: पुरानी बिल्डिंग में संचालित हो रहे एक्स-रे सेंटर के पास के कमरों में सीएसआर फंड के जरिए मैमोग्राफी मशीन स्थापित हो सकती है। पीडब्ल्यूडी की देखरेख में गुडलक कंस्ट्रक्शन की ओर से खिड़कियों को बंद कर सिविल वर्क का करवाया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि यहां मशीन स्थापित होने से महिलाओं को राहत मिलेगी। मैमोग्राफी मशीन के लिए एक्स-रे सेंटर के पास रूम तैयार किया गया है। सीएसआर फंड से जल्द ही मैमोग्राफी मशीन लगने की उम्मीद है। - डॉ. हनुमानराम चौधरी, अधीक्षक जिला अस्पताल।