बांसवाड़ा के प्रसिद्ध मानगढ़ धाम में गुरुवार को महासम्मेलन में करीब 40-50 हजार की संख्या में आदिवासी लोग पहुंचे। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र और केंद्र शासित दादरा नगर हवेली समेत 4 राज्यों से आदिवासी शामिल हुए। सामाजिक और गैर-राजनीतिक बैनर तले यह कार्यक्रम भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम में सभी ने एक स्वर में नए भील प्रदेश की मांग की। इस दौरान बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र सांसद राजकुमार रोत ने कहा- चार राज्यों की सरकारों ने नजरअंदाज किया। जिससे यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। आदिवासियों के साथ सभी सरकारों ने सौतेला व्यवहार किया। एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य की मांग भारत आदिवासी पार्टी (BAP) जिला उपाध्यक्ष विनोद कुमार खराड़ी ने बताया- कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों के अधिकारों की आवाज उठाना और एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य की मांग को पुरजोर तरीके से सरकार के सामने रखना है। आजादी के इतने सालों बाद भी आदिवासी क्षेत्रों का विकास नहीं हो पाया है। वर्तमान में आदिवासी समाज अलग-अलग राज्यों की सीमाओं में बंटा हुआ है, विशेषकर बॉर्डर पर रहने वाले आदिवासियों को हर स्तर पर नुकसान उठाना पड़ता है। अलग भील प्रदेश का गठन करने की मांग भारत आदिवासी पार्टी (BAP) जिला उपाध्यक्ष विनोद कुमार खराड़ी ने बताया- यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज के अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई हैं। हमारी मांग है कि आदिवासियों को उनका हक मिले और बिखरे हुए आदिवासी क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग भील प्रदेश का गठन किया जाए, ताकि बॉर्डर इलाके के लोगों को हो रहे नुकसान से बचाया जा सके। ​आयोजन समिति के भंवरलाल परमार और आदिवासी परिवार के सदस्यों की देखरेख में पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ। साथ ही कहा कि हर साल 17 जुलाई को यह महासम्मेलन आयोजित किया जाता है। आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं ​मिल रहा भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के जिला संयोजक राजेश वसुनिया, प्रदेश संयोजक रविन्द्र बरजोड़, हीरालाल दामा सहित अन्य मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने कहा- नौकरियों में आदिवासियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था तो है, लेकिन धरातल पर उसका पूरा लाभ समाज के युवाओं को नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासियों के उत्पीड़न और प्रताड़ना के मामलों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। सासंद रोत नहीं पहुंचे, फोन से ​मैसेज दिया सांसद राजकुमार रोत स्विट्जरलैंड होने के कारण वह कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए, लेकिन उन्होंने फोन के माध्यम से लोगों को संदेश पहुंचाया कि चार राज्यों की सरकारों ने नजरअंदाज किया। जिससे यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। आदिवासियों के साथ सभी सरकारों ने सौतेला व्यवहार किया। अब लोग फिर से पुरजोर तरीके से भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं। सरकारों की नाकामी की वजह से लोगों की यह मांग है। ​बीएपी (BAP) विधायकों ने दिखाई एकजुटता ​भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के कई प्रमुख विधायक और नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए। ​कमलेश डोडियार (विधायक, रतलाम, मध्य प्रदेश) ​थावरचंद मीणा (विधायक, धरियावद) ​उमेश मीणा (विधायक, आसपुर) ​अनिल कटारा (विधायक, चौरासी) ​जयकृष्ण पटेल (विधायक, बागीदौरा)