राजस्थान के MBBS स्टूडेंट रतन मेघवाल ने 14 मार्च 2026 को गुजरात के राजकोट में ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। जैसलमेर जिले के फलसुंड गांव का रतन राजकोट एम्स में फाइनल ईयर का स्टूडेंट था। 19 दिन बाद भी उसकी आत्महत्या अनसुलझी पहेली बनी हुई है। उसने इंस्टाग्राम पर 18 पेज का सुसाइड नोट पोस्ट किया था, जिसमें 5 स्टूडेंट्स पर उसे मेंटली और फिजिकली टॉर्चर करने का आरोप लगाया। रतन के घरवालों ने भी उन पांचों स्टूडेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, पुलिस का कहना है कि रतन ने एकतरफा प्यार में काल्पनिक कहानी बना ली। सच जानने के लिए भास्कर ने तीनों एंगल से मामले में पड़ताल की। सबसे पहले जानिए, क्या लिखा था सुसाइड नोट में… रतन ने अपने इंस्टाग्राम पर 18 पेज का सुसाइड नोट पोस्ट किया था। इसमें उसने बताया कि 27/1/26 को प्रणव पालीवाल, अस्मित शर्मा, युवराज चौधरी, निर्विघ्नम नूर और आयुष यादव ने हॉस्टल के कमरा नंबर 203 में उसके साथ मारपीट की। उन्होंने उसके वीडियो और ऑडियो भी रिकॉर्ड किए। इस सुसाइड नोट में रतन ने बताया था कि वो एक साथी स्टूडेंट से अटैच था। बीच में दोनों में अपने-अपने पर्सनल ईगो के चलते तनाव हो गया था। इसी तनाव का फायदा एक दूसरे स्टूडेंट प्रणव ने उठाया। छात्रा प्रणव और उसके दोस्तों का शिकार हो गई थी। वो उनके इशारे पर मुझे परेशान करने के इस खेल में उनका मोहरा बन गई थी। हालांकि इसमें छात्रा की कोई गलती नहीं है और न ही उसे या उसके माता-पिता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। वो खुद इन लड़कों द्वारा किए गए 'दिमागी खेल' और 'लव बॉम्बिंग' का शिकार हुई थी। इस सुसाइड नोट में बताया कि छात्रा और उसके बीच प्यार नहीं था, लेकिन गहरा भावनात्मक लगाव था। बाद में दोनों के बीच गलतफहमी हुई थी। बातचीत बंद होने के कारण स्थिति बिगड़ गई। प्रणव ने उसके और लड़की के बीच तनाव का फायदा उठाया। उसने लड़की को इमोशनली बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसा लिया। रतन ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह छात्रा को प्रणव के टाइम पास गेम से बचाना चाहता था। इसी के चलते उसने छात्रा के घर कॉल कर प्रणव के बारे में उसके भाई को बता दिया। जब छात्रा और प्रणव व उसके दोस्तों को ये जानकारी लगी तो वो उससे नाराज हुए। इसके बाद ही प्रणव ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर 27 जनवरी को उसके साथ मारपीट की। सुसाइड नोट में रतन ने मांग की थी कि प्रणव सहित सभी 5 लड़कों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और एफएसएल द्वारा उनके फोन की जांच की जाए, ताकि हटाए गए वीडियो और सबूत मिल सकें। वहीं कॉलेज से अनुरोध किया है कि छात्रा के खिलाफ कोई कानूनी या शैक्षणिक कार्रवाई न की जाए। उसे पेशेवर परामर्श और पढ़ाई पूरी करने में सहायता प्रदान की जानी चाहिए। नोट : पहले वाले 17 पेज के सुसाइड नोट में इसी तरह की बातों और घटना का जिक्र किया गया था। पिता बोले- हमारे बेटे को टॉर्चर किया भास्कर टीम फलसुंड गांव पहुंची तो रतन के घर में बैठक चल रही थी। रतन के पिता मोहनलाल गुमसुम बैठे थे। भास्कर रिपोर्टर से बोले- मेरा बेटा रतन इतना कमजोर नहीं था, लेकिन उसे इतना टॉर्चर किया गया कि उसने ये कर लिया। मोहनलाल ने बताया कि मामले की शुरुआत 29 या 30 जनवरी को हो गई थी। उस दिन मेरे पास राजकोट से रतन के हॉस्टल से वार्डन और उसके प्रोफेसर राजेंद्र सर के कॉल आए थे। बताया कि आपके बेटे ने कोई लेटर लिखा है। इसके बाद से वो हॉस्टल से गायब है। हमें चिंता हुई तो आनन-फानन में मैं अपने छोटे भाई मांगीलाल के साथ प्लेन से राजकोट पहुंचा। इधर राजकोट पुलिस भी रतन को ढूंढ रही थी। शाम होने से पहले ही पुलिस ने रतन को रेलवे ट्रेक के पास से ढूंढ़ लिया। तब हम उसे गांव ले आए। इस दौरान हमें पता चला कि उसके साथ पढ़ने वाले कुछ दूसरे स्टूडेंट्स ने उसके साथ जमकर मारपीट की थी। उसके साथ जातिगत और मानसिक प्रताड़ना की। गांव आने के बाद हमने रतन से बात की कि अगर वो खुद को अनसेफ मानता है तो हम अपने खर्चे पर पुलिस सिक्योरिटी ले लेते हैं। वह चाहे तो एक साल का मेडिकल लेकर एमबीबीएस को एक साल आगे पोस्टपोन कर देते हैं। कोई बात नहीं अगर एक साल का बैक भी लग जाए तो। हमने उसे ये भी कहा कि अगर वो कहे तो कानूनी कार्रवाई कर आरोपी स्टूडेंट्स के परिवार वालो से भी बात कर इस मामले का निस्तारण कर दे। हालांकि, रतन इनमें से किसी ऑप्शन पर अपनी कोई राय नहीं देता था। इस बीच वो करीब डेढ़ महीना गांव में घर पर ही रहा। 11-12 मार्च को उसने हमें बताया कि उसे एग्जाम देने राजकोट जाना है। उसने हम सब को आश्वस्त किया कि वो मामला अब खत्म हो गया है और कोई टेंशन की बात नहीं हैं। इसके बाद 13 मार्च को वो यहां से राजकोट पहुंचा। फोन पर उसने अपने एक दोस्त के घर जाने की बात बताई। कहा कि उसके बाद वो फिल्म देखने भी जाएगा। हॉस्टल नहीं जाएगा। हमने उससे दोस्त का नाम पूछा पर उसने नहीं बताया। बाद में उसका फोन स्विच ऑफ़ आने लग गया। अगली सुबह जल्दी मैंने फिर उसके फोन किया। इस बार रिंग गई पर किसी ने कोई फोन नहीं उठाया। थोड़ी देर बाद कॉल वापस आया पर सामने से रतन नहीं किसी पुलिसकर्मी की आवाज थी। उसने बताया कि रतन की ट्रेन से कटने से मौत हो गई हैं। ये बताते-बताते रतन के पिता रोने लगे। चाचा बोले- कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन ने नहीं किया सहयोग रतन के चाचा मांगीलाल चौहान ने बताया कि उनकी सात पीढ़ियों में रतन से ज्यादा पढ़ा लिखा कोई नहीं था। पढ़ाई के दौरान कभी कोई शिकायत भी नहीं आई थी। हादसे की जानकारी मिली तो हम राजकोट पहुंचे तो वहां एम्स एडमिनिस्ट्रेशन ने हमारा कोई सहयोग नहीं किया। हालांकि राजकोट पुलिस ने हमारी हर संभव मदद की। वहीं हमें पता चला कि इस बार भी रतन ने एक सुसाइड नोट लिखा था, जिसमे उस ने आरोपियों के नाम भी लिखे थे, जिनकी वजह से उसे ये कदम उठाना पड़ा था। हमने इसी सुसाइड नोट के आधार पर वहां एफआईआर दर्ज करवाई कि 23 साल के रतन को उसके सहपाठी प्रणव पालीवाल, अस्मित शर्मा, युवराज चौधरी, निर्विघ्नम नूर और आयुष यादव लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। आरोपी रतन को बार-बार अपमानित करते थे और उसे परेशान करते थे। इस लगातार उत्पीड़न के कारण वह मानसिक तनाव में आ गया था और ट्रेन के आगे कूद गया। हालांकि मांगीलाल ने अपनी बातचीत में जातिगत भेदभाव जैसी बात नहीं मानी। इधर, सहयोग नहीं करने के आरोपों पर राजकोट एम्स के पीआरओ हिमांशु मकवाना ने बताया कि एम्स प्रबंधन ने हर संभव सपोर्ट परिवार को मुहैया करवाया था। रतन ने छोटे भाई को बताई थी टॉर्चर की कहानी छोटे भाई भीमाराम का कहना है कि उसके बड़े भाई रतन ने उसे बताया था कि उसे हॉस्टल के कमरा नंबर 203 में बुलाकर दरवाजे बंद कर दिए गए थे। इसके बाद सभी खिड़कियों और रोशनदान तक को गत्तों से बंद कर अंदर नंगा करके लात-घूंसों और बेल्ट से पिटाई की थी। इस दौरान उससे माफी मंगवाई गई और इस पूरे वाकये के वीडियो बनाये गए। रतन को उसका करियर खराब करने तक की धमकियां दी गई। इस के बाद ही वो डिप्रेशन में आ गया था। भीमाराम ने बताया कि रतन की मौत के बाद से उसके पिता मोहनलाल और मां बादु देवी मानसिक अवसाद में हैं। वो कई बार हमें कहते हैं कि जो बॉडी हम राजकोट से लाए थे, वो किसी और की थी। रतन तो वहां पढ़ाई कर रहा है। कई बार माता-पिता बिना किसी को बताए घर से निकल जाते हैं। पुलिस बोली-एकतरफा प्यार में बना ली काल्पनिक घटनाओं की दुनिया रतन के परिवार के बाद रिपोर्टर ने राजकोट एसपी जगदीश बांगडवा से बात की। उन्होंने बताया कि सुसाइड नोट के आधार पर पांचों आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि अब तक कि जांच में सुसाइड नोट के अलावा उन सभी के विरुद्ध कोई एविडेंस नहीं मिला है। जब पहली बार रतन अपने साथ मारपीट की बात कह कर हॉस्टल से गायब हुआ तो वो पुलिस को मिल गया था। एक्सपर्ट्स ने कहा- कल्पना कर लिखा गया है सुसाइड नोट राजकोट के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि- हमने उसके दोनों सुसाइड नोट्स का साइकेट्रिक एक्सपर्ट्स से विश्लेषण करवाया था। एक्सपर्ट का मत है कि जिस तरह से नोट लिखा गया है ये एकतरफा प्यार के बाद अपनी इल्यूजन से घटनाओं की कल्पना कर लिखा गया जैसा लगता है। इस तरह की मेंटल कंडीशन में एक व्यक्ति ये मान लेता है कि उसके साथ ऐसा हुआ है, जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं होता है। जिस तरह से लंबे-लंबे सुसाइड नोट लिखे गए हैं, वो सुसाइड के दौरान की कंडीशन में लिखना संभव नहीं है। लड़की बोली- रतन से नहीं था कोई अट्रैक्शन एसपी ने बताया कि- हमने सुसाइड नोट में लव ट्रायंगल का जिक्र को लेकर भी जांच की थी। जिस छात्रा को लेकर सुसाइड नोट ये सभी बातें कही गई थी, उससे भी पुलिस ने बात की है। उसने बताया कि उसका रतन के साथ कभी भी कोई आकर्षण नहीं रहा था। हालांकि, दो तीन बार रतन ने उसे एप्रोच किया था, लेकिन उसने मना कर दिया था। इसके बाद रतन अलग-अलग रह रहा था। डॉक्टर बोले-रतन को मानसिक परेशानी थी भास्कर ने मामले में रतन का इलाज करने वाले जोधपुर के डॉक्टर घनश्याम कुलवाल से भी बात की। उन्होंने बताया कि रतन को उनके परिजनों ने दो बार उन्हें दिखाया था। उसे मानसिक परेशानी थी। वो गुमसुम रहता था। उसे शकी विचार भी आते थे। उसके पिता मोहनलाल ने बताया था कि उसे ये तकलीफ पिछले 8 साल से थी। इस पर मैंने उन्हें ट्रीटमेंट लिखकर उसकी साइक्लोजिकल जांचें करवाने और उसे एडमिट करवाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने ये तब नहीं किया था।